बागियों की एंट्री से भाजपा में उठे बगावत के सुर
- कार्यकर्ता मान रहे, पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र खात्मे की ओर
- सब कुछ दिल्ली से तय होगा तो कार्यकर्ता कैसे काम करेगा
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कांग्रेस के बागी विधायकों की एंट्री होते ही भाजपा में भी बगावत के सुर उठने लगे हैं। आलाकमान ने भले ही बागियों को गले लगा लिया हो, लेकिन अंदरखाने कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष पनप रहा है। भाजपाई यहां तक कहने लगे हैं कि सब कुछ दिल्ली से तय होने से पार्टी में अब आंतरिक लोकतंत्र खत्म होने लगा है।
बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने से पार्टी के प्रति समर्पित, निष्ठावान पुराने नेता और कार्यकर्ता शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर हैरानगी जता रहे हैं। देहरादून जिले में तो कतिपय नेता खुलकर बागी तेवर दिखाने लगे हैं। तो कई कार्यकर्ता अंदर ही अंदर बागियों के भाजपा में शामिल होने पर विरोध कर रहे हैं।
जहां तक देहरादून जिले का सवाल है, तो यहां पर सबसे ज्यादा नाखुशी लोगों को कांग्रेस में बगावत के सूत्रधार पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत और पूर्व विधायक उमेश शर्मा काऊ को लेकर है। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि जो संकेत मिल रहे हैं, उससे यह लगने लगा है कि पार्टी हरक सिंह रावत को विधान सभा चुनाव में उनकी पसंदीदा सीटों सहसपुर, डोईवाला या धर्मपुर में से किसी एक पर टिकट देने का मन बना रही है।
बागी आएंगे तो इनका क्या होगा?
सहसपुर में सहदेव सिंह पुंडीर भाजपा के सीटिंग विधायक हैं। जबकि डोईवाला से पूर्व मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मजबूत दावा रखते हैं। इसी तरह, धर्मपुर सीट पर पिछले विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे प्रकाश सुमन ध्यानी, महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल, मेयर विनोद चमोली भाग्य आजमाने की तैयारी में जुटे हैं।
ऐसे में इन दोनों सीटों पर भाजपा कैडर वोट के बिखरने पर हरक सिंह की राह आसान नहीं होगी। इसी तरह, रायपुर में उमेश शर्मा काऊ को अगर भाजपा अपना चेहरा बनाती है तो यहां कई पुराने भाजपाई काऊ का सीधा विरोध करने के मूड में दिख रहे हैं। रायपुर सीट से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े पुराने भाजपाई वरिष्ठ अधिवक्ता राजकुमार पुरोहित दमखम के साथ विधायकी की दावेदारी के साथ पिछले दो साल से खासे सक्रिय हैं।
सूत्रों का कहना है कि अधिवक्ता पुरोहित तो कांग्रेस के बागी को टिकट देने की संभावना के विरोध में पार्टी नेतृत्व के सामने आपत्ति भी जता चुके हैं। इसी तरह, विश्व हिंदू परिषद के महेंद्र सिंह नेगी भी रायपुर में काऊ को भाजपा से टिकट मिलने की संभावना को देखते हुए खुलकर विरोध में आ चुके हैं। खैर बगावत और असंतोष की चिंगारी के बीच राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा यह देखना दिलचस्प होगा।