पढ़िए, आत्मदाह कांड के दागी कांग्रेसी नेता का काला अतीत
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चार दिन पहले रामनगर में हुए आत्मदाह कांड का दागी ब्लॉक प्रमुख संजय सिंह नेगी कालाढूंगी कांड में भी अभियुक्त था, लेकिन सरकार ने ही मुकदमा वापस ले नेगी को राहत बख्शी। जिसका परिणाम अब रामनगर में सामने आया।
कालाढूंगी के मामले में जिस तरह से प्रदेश की राजनीति नतमस्तक हुई, उसी तरह से रामनगर के मामले में भी नेताओं की लॉबिंग हो रही है।
कालाढूंगी में 23.08.2009 को ब्लॉक प्रमुख बलवंत सिंह कन्याल का थाने के भीतर ही मर्डर कर दिया गया। इसके बाद भड़की भीड़ ने हेड कांस्टेबल पूरण को जान से मार कर थाना जला दिया।
गंभीर धाराओं में अज्ञात के नाम अभियोग पंजीकृत कर हुआ। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी तो सबूतों के आधार पर पुलिस ने मिंटू चौधरी व संजय सिंह नेगी को दोषी पाते हुए चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी।
जांच में पाया गया कि इन्होंने ही भीड़ को उकसाया, जिसके बाद यह हादसा हुआ। लेकिन राज्य सरकार ने 07.06.2011 को मुकदमा वापस ले लिया।
पुलिस ने की थी नेगी के लिप्त होने की पुष्टि
नैनीताल जिला पुलिस की उस सिफारिश को भी रद्दी की टोकरी में डाल दिया, जिसमें मुकदमा वापस नहीं लिए जाने की पैरवी की गई थी। कालाढूंगी कांड में नेगी के अभियुक्त होने की पुष्टि एडीजी लॉ एंड ऑर्डर राम सिंह मीणा ने भी की।
चार दिन पहले रामनगर में आत्मदाह के प्रयास की घटना और उसके बाद हुए बवाल के लिए भी पुलिस ने संजय सिंह नेगी को ही मुख्य योजनाकार मानते हुए आईपीसी की धारा 306, 307, 309 के तहत अभियुक्त बनाया है।
नैनीताल कांग्रेस की राजनीति पूरी तरह से संजय सिंह नेगी के इर्द-गिर्द घूम रही है। मंत्री इंदिरा हृदयेश ने जिला पुलिस पर तो निशाना साधा, लेकिन संजय सिंह नेगी की पृष्ठभूमि पर नजर डालने की जहमत नहीं उठाई और कोतवाल न हटाने पर नाराजगी दर्शाती रहीं।
नेताओं की ऊर्जा पुलिस को कसूरवार ठहराने और कोतवाल को बदलने में लग गई। हो सकता है कि कुछ दिन बाद इस बवाल में दर्ज मुकदमों की वापसी की फाइल भी चालू हो जाए।