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रमजान का मतलब हर बुराई से तौबा
अमर उजाला, रुड़की/पिरान कलियर
Updated Tue, 01 Jul 2014 12:24 PM IST
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माह-ए-रमजान के पहले दिन सोमवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सहरी के बाद दिनभर रोजा रखा।
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रात में अदा की गई तरावीह की नमाज
वहीं शाम को इफ्तारी की गई। मस्जिदों में कुरान ख्वानी व तरावीह शुरू हो गई। नमाज के बाद उलेमाओं ने रोजे के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रमजान का मतलब सिर्फ भूखे रहना नहीं, बल्कि बुराइयों से तौबा करना है।
चांद रात के साथ ही मस्जिदों में शुरू हुई तरावीह सोमवार को भी जारी रही। इससे पहले सुबह सहरी के बाद लोगों ने रोजा रखा। शाम को इफ्तारी के बाद रात में तरावीह की नमाज अदा की गई।
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कलियर में नमाज के बाद उलेमाओं ने मोमीनो को रमजान का महत्व बताया। उन्होंने फरमाया कि रमजान का मतलब सिर्फ दिनभर भूखे रहना ही नहीं, बल्कि सभी बुराइयों से भी तौबा करना है।
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उन्होंने रमजान में अंग-अंग का रोजा रखने की सलाह दी। पिरान कलियर सहित रुड़की, मंगलौर, भगवानपुर, लक्सर, सुल्तानपुर, नारसन आदि क्षेत्रों की मस्जिदों में नमाज के साथ ही तरावीह शुरू हो गई।
माह-ए-रमजान के पहले रोजे को लेकर मोमीनों में उत्साह रहा। लोगों ने एक दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी।
नीयत पर काबू रखें रोजेदार
रमजान के पवित्र माह में लड़ाई झगड़े से बचना चाहिए क्योंकि इससे रोजे का सबाब कम हो जाता है। रोजे के दौरान भूख प्यास पर ही नहीं बल्कि जुबान और नीयत पर भी काबू रखना चाहिए।
मदरसा सबीलुस्सलाम के मुफ्ती राशिद ने बताया कि रमजान माह के दौरान मुस्लिम समाज के लोग तड़के सहरी के बाद पूरे दिन भूखे प्यासे रहकर रोजा रखते हैं और शाम को इफ्तार करते हैं।
रोजे के दौरान कुछ भी खाने पीने की पूरी पाबंदी रहती है। साथ ही कुछ वजह ऐसी भी होती है जिनसे रोजा टूटने का खतरा होता है। मदरसा सबीलुस्सलाम के मुफ्ती राशिद के मुताबिक बीमारी में इंजेक्शन लगवाया जा सकता है।
ऐसा करेंगे तो टूट जाएगा रोजा
इसी तरह कान में पानी जाने तथा उल्टी होने से रोजा बना रहता है। जिस महिला का पति गुस्सैल हो उसे सब्जी आदि में नमक चखने की छूट है।
जान बूझकर अगरबत्ती की गंध सूंघने, आंख और कान में दवाई डालने होम्योपैथिक दवाई जीभ पर रखने, वजू करते और नहाते वक्त मुंह में पानी चले जाने से रोजा टूट जाता है।
कारी नसीम मंगलौरी के अनुसार रोजा याद न रहने पर भूल वश कुछ खाने से रोजा बना रहता है।
इसी तरह रोजेदार को झूठ बोलने गाली गलौज करने लड़ाई-झगड़े और चुगलखोरी, पराई औरतों को जान बूझ कर देखने, ताश खेलने से दूर रहना चाहिए। ऐसा करने वालों का रोजा तो नहीं टूटता लेकिन सबाब कम हो जाता है।