इस पहाड़ी सब्जी में हैं खूबियां, नहीं खाते तो खाना शुरू करें
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आपको शायद ही पता होगा कि पहाड़ में पाये जाने वाले राम करेले का उपयोग सब्जी के साथ दवा के रूप में भी किया जा सकता है। इसे नहीं खाते हैं तो खाना शुरू कर दें...
केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान के शुरुआती शोध में पता चला है कि इसमें न केवल पर्याप्त मात्रा में आयरन मौजूद है, बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट और खून को साफ करने वाले तत्व भी हैं।
उद्यान विभाग के अधिकारियों ने केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान के साथ मिलकर राम करेले के उपयोगी गुणों को प्रदेश से बाहर भी पहचान दिलाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। खास बात यह भी है कि सामान्य करेला जहां स्वाद में कड़वा होता है वहीं राम करेला जरा भी कड़वा नहीं होता है। हरी सब्जी के रूप में बच्चे और महिलाएं भी इसका स्वाद ले सकते हैं।
केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान मुक्तेश्वर के वैज्ञानिक डॉ. राजनारायण ने बताया कि राम करेला लौकी कुल की सब्जी है। इसका वैज्ञानिक नाम सिलेंथरा पेडाटा (एल) स्चार्ड है। इस सब्जी का नाम राम करेला क्यों पड़ा यह तो किसी को पता नहीं, लेकिन किवदंती है कि भगवान राम ने वनवास के दौरान इसका सेवन किया था।
रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है राम करेला
कुछ लोगों का मानना है कि आकार में छोटा और इसमें बीमारियों का रामबाण इलाज होने के कारण इसका नाम राम करेला पड़ा। इसके एक पौधे से सैकड़ों राम करेले प्राप्त किए जा सकते हैं।
डॉ. राज नारायण और मुकेश मेर अपने सहयोगियों के साथ राम करेले के वैज्ञानिक गुणों पर अध्ययन कर रहे हैं। उनके साथ भटेलिया के उद्यान सचल दल के प्रभारी संतोष कुमार भी शामिल हैं। काश्तकारों को इस फसल से अधिक मुनाफा कैसे मिले इस दिशा में भी वैज्ञानिक और अधिकारी काम कर रहे हैं।
राम करेले की खास बात यह है कि कम मेहनत में इसका अधिक उत्पादन होता है। इसमें कीट और बीमारियों का प्रकोप भी नगण्य रहता है। पहाड़ में सितंबर के तीसरे सप्ताह से लेकर अक्तूबर अंत तक राम करेले का उत्पादन होता है। डॉ. राजनारायण कहते हैं कि कम लागत में अधिक फायदे देने वाले राम करेले में एंटी ऑक्सीडेंट, आयरन और रक्त साफ करने वाले तत्व मौजूद हैं।
इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। वैज्ञानिकों और अधिकारियों का प्रयास है कि इसे उत्तराखंड से बाहर भी पहचान दिलाई जाए। डॉ. राजनारायण बताते हैं कि मैदानी क्षेत्रों में यह पौधा कितना कारगर साबित होता है इस दिशा में शोध किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कुछ मैदानी क्षेत्रों में भी राम करेले के बीज रोपे गए हैं। देखना है कि यह वहां होता है या नहीं। यदि मैदानी क्षेत्रों में राम करेला नहीं हुआ तो इसे पहाड़ से ठीक वैसे ही मंडी तक भेजने के प्रयास होंगे जैसे कि पहाड़ के फलों को मंडी तक भेजा जाता है।