राज्यसभा चुनाव का नामांकन आज से, भाजपा भी लगा रही जोर
- प्रत्याशियों के नाम का चयन नहीं कर पाई राजनीतिक पार्टियां
- कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन का जिम्मा केंद्रीय आलाकमान पर छोड़ा
- प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा कोर कमेटी की बैठक आज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राज्यसभा सांसद चुनाव को लेकर जहां एक तरफ बिगुल बज चुका है और प्रत्याशियों के नामांकन की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हो जाएगी। वहीं कांग्रेस, भाजपा और पीडीएफ में प्रत्याशियों के चयन को लेकर उहापोह की स्थिति है।
पार्टी प्रत्याशी के चयन को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का कहना है कि कुछ दावेदारों ने आवेदन किया है। जिनके आवेदन पत्र केंद्रीय आलाकमान को भेजे जा रहे हैं। कारण कि प्रत्याशी के चयन का अंतिम फैसला केंद्रीय आलाकमान को ही करना है।
कमोवेश यही स्थिति भाजपा की भी है। भाजपा भी अभी तक प्रत्याशी का चयन नहीं कर पाई है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि मंगलवार को कोर कमेटी के पदाधिकारियों, विधायकों, जिलाध्यक्षों की बैठक बुलाई गई है। जिसमें सर्वसम्मति ने प्रत्याशियों का पैनल तैयार किया जाएगा और पैनल रिपोर्ट केंद्रीय आलाकमान को भेज दी जाएगी।
भाजपा का संख्याबल कम, पर उम्मीद बरकरार
प्रत्याशी प्रदेश इकाई की ओर से भेजे गए पैनल का कोई सदस्य हो सकता है या फिर केंद्रीय आलाकमान किसी अन्य प्रत्याशी के नाम पर सहमति दे सकती है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भट्ट का यह भी कहना है कि बेशक हम संख्या बल में कम है, लेकिन चुनाव आखिरकार चुनाव ही होता है। चुनावी जंग में पार्टी की ओर से प्रत्याशी जरूर उतारा जाएगा।
पीडीएफ पर टिकी भाजपा की नजर
राज्यसभा सांसद चुनाव को लेकर भाजपा की नजर पीडीएफ पर है। प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि प्रत्याशी को लेकर पीडीएफ दावेदारी कर रही है। ऐसे में यदि पीडीएफ किसी प्रत्याशी को मैदान में उतारती है तो ऐसे में कांग्रेस की मजबूरी होगी कि वह पीडीएफ का साथ दें वरना दोबारा संख्या बल का संकट खड़ा हो सकता है।
पीडीएफ को मिलाकर कांग्रेस के पास 33 विधायक हैं। ऐसे में यदि प्रत्याशी को लेकर पीडीएफ और कांग्रेस में कोई समझौता नहीं होता और इस मुद्दे को लेकर दोनों अलग अलग राह पकड़ते हैं तो इसका फायदा भाजपा को मिलेगा।