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बारिश से गढ़वाल का बुरा हाल, टूटी सड़कें-पहिये जाम
ब्यूरो / अमर उजाला, गढ़वाल
Updated Thu, 02 Jul 2015 11:25 AM IST
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उत्तराखंड के गढ़वाल में तीन दिनों तक हुई भारी बारिश से टूटी सड़कों ने तीर्थयात्रियों की ही नहीं बल्कि स्थानीय लोगों की दिक्कतें भी बढ़ा दी हैं। चमोली जिले की ही बात करें तो यहां 27 मोटर मार्ग बंद हो गए हैं। रुद्रप्रयाग में भी नौ मोटर मार्गों पर आवाजाही बंद है। पौड़ी जिले में भी 27 सड़कों पर यातायात का पहिया जाम है।
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लोक निर्माण विभाग के अनुसार बारिश से लैंसडौन-रिखणीखाल-बीरोंखाल, पाबौ-संतूधार-दमदेवल जिला मार्ग समेत 27 सड़कें बंद हैं। इनमें लोनिवि निर्माण खंड पौड़ी और निर्माण खंड बैंजरों की तीन-तीन, प्रांतीय खंड लैंसडौन और पीएमजीएसवाई श्रीनगर की एक-एक, निर्माण खंड दुगड्डा और श्रीनगर की चार-चार, पीएमजीएसवाई खंड कोटद्वार, सतपुली की दो-दो और पीएमजीएसवाई खंड बैंजरों की तीन सड़कें शामिल हैं।
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लोनिवि के अधीक्षण अभियंता राजेश शर्मा ने बताया कि बंद सड़कों पर यातायात सुचारु करने के लिए काम चल रहा है।
चमोली जिले में 27 सड़कों के बंद होने के साथ ही लंगासू में 11 हजार केवी का बिजली का तार टूटने बिजली व्यवस्था भी ठप है। बारिश से कर्णप्रयाग की छह, नारायणबगड़ में सात, थराली में दो, देवाल में चार और गैरसैंण में तीन सड़कें बंद हो गई हैं। पिंडर घाटी को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग कर्णप्रयाग-ग्वालदम भी कई जगह मलबा आने से बाधित हो गया।
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वहीं गोपेश्वर में सोनला-बधाण-मैखुरा, कर्णप्रयाग-सुनाली, गोपेश्वर-पोखरी, हापला-धोतीधार और गोपेश्वर मंडल-ऊखीमठ मार्ग भी बंद पड़े हैं। चमोली-गोपेश्वर मोटर मार्ग भी कोठियालसैंण में सुबह सात बजे भूस्खलन से बंद सड़क करीब चार घंटे बाद खोली जा सकी।
लोनिवि के अधीक्षण अभियंता विशन लाल का कहना है कि बारिश से सड़कों को खोलने में दिक्कतें आ रही हैं। शीघ्र ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा।
कर्णप्रयाग में आदिबदरी-नौटी, दशोलीखाल-भटियाणा, गौचर-दुआ-कांडा, रानौं-सिमखोली, सहित देवलीबगड़, कर्णप्रयाग-नैनीसैंण देवाल के खेतामानमती, सवाड़, लोहाजंग-वाण, ग्वालदम-नंदकेशरी, गैरसैंण में ढांगा-पज्याड़ा, आगरचट्टी-बोखनारा, गैरसैंण-घंडियाल मार्ग आदि बंद हो गए।
रुद्रप्रयाग में नौ मोटर मार्ग बंद
रुद्रप्रयाग में मंगलवार रात से रुक-रुककर हो रही बारिश से जिले में नौ मोटर मार्ग मलबा-पत्थर आने से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार ने बताया कि बलसूंडी-अखोड़ी, बस्ती से हाट, रुद्रप्रयाग-नारी, दुलाधार बैंड से गणेशनगर, कोलूबैंड से स्वांरीग्वांस, सणगू-सारी, फाटा-जामू, एक्सजेंशन जुगासू-रांसी-तलसारी और लमगौंडी-दिउली भणिग्राम मोटर मार्ग मलबा-पत्थर आने से अवरुद्ध हो गए हैं। उन्हें खोलने का काम किया जा रहा है।
मलबा आने से डेढ़ घंटे बाधित रहा हाईवे
बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे बारिश से केदारनाथ हाईवे बांसबाड़ा व भीरी के बीच पहाड़ी से मलबा आने से डेढ़ घंटे बाधित रहा। इससे दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। मार्ग बाधित होने की सूचना मिलने पर लोनिवि एनएच इकाई मौके पर मशीन और कर्मचारी के साथ पहुंची। जेसीबी के जरिए सड़क से मलबा हटाकर लगभग 9.30 बजे यहां पर वाहनों की आवाजाही सुचारु की गई।
दुकान के ऊपर अटका बोल्डर, हादसा टला
बुधवार को बदरीनाथ मंदिर के पैदल पुल के समीप स्थित नवल रत्न इंपोरियम के पीछे भूस्खलन होने से एक बोल्डर दुकान के ऊपर आ गया। गनीमत रही कि पत्थर छिटक कर कुछ ही दूरी पर अटक गया, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया।
पत्थर की चपेट में आने से इंपोरियम का जनरेटर क्षतिग्रस्त हो गया है। इंपोरियम के मालिक प्रमोद गोयल ने बताया कि दोपहर में 12 बजकर 20 मिनट पर भारी बारिश के बीच एक पत्थर मिट्टी सहित दुकान की छत से कुछ दूरी पर अटक गया, जिसके बाद शीघ्र दुकान खाली कर सामान को दूसरी जगह रख दिया गया।
पिंडर नदी उफान पर, अलर्ट जारी
मंगलवार सुबह से शुरू हुई बारिश बुधवार शाम तक भी नहीं थमी। जिला आपदा प्रबंधन के आंकड़ों के अनुसार कर्णप्रयाग में 70.6 मिमी, चमोली में 70.0 और जोशीमठ में सबसे कम 47.08 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है। बारिश से उफान पर आई नदियों के किनारे बस्तियों को खतरा बन गया है।
उपजिलाधिकारी विवेक प्रकाश ने नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को कर्णप्रयाग में पिंडर नदी का जलस्तर 767.0 आंका गया। नदी के उफान से नदी किनारे बने स्नानाघाट और बाढ़ सुरक्षा कार्य जलमग्न हो गए हैं। नगर पंचायत की ओर से सुभाषनगर के लिए बनाई लाखों की सड़क कई जगह क्षतिग्रस्त हो गई।
तटबंध टूटे गांव में घुस रहा पानी
बुधवार सुबह से हो रही तेज बारिश से मलबा आने से नारायणबड़ के डुंग्री ग्राम पंचायत के सेंटुलधार तोक में मोहन प्रसाद का मकान क्षतिग्रस्त हो गया है। सिलोड़ी में निर्माणाधीन प्राथमिक विद्यालय की सुरक्षा दीवार सहित कई गांवों को जाने वाले पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
थराली में पिंडर नदी के उफान से बैनोली गांव को खतरा बन गया है। सुरक्षा तटबंध टूटने से पिंडर नदी का पानी गांव में घुस रहा है। वहीं देवाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मलबा भर गया है। पिंडर और कैल नदियों के उफान से सोडिंग, ओडर, लिंगड़ी, बोरागाड़, रैन आदि गांवों में भू-कटाव का खतरा बन गया है।