चीन सीमा पर कागजों में खिंची गई रेल लाइन
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उत्तराखंड से सटी 350 किलोमीटर चीन सीमा के बावजूद रेलवे मंत्रालय सामरिक महत्व की रेल परियोजनाओं पर कोई काम नहीं हुआ है।
सीमा पार चीन तेजी से रेल लाइनों का जाल बिछा रखा है, जबकि भारतीय रेलवे अभी तक केवल कागजों में लाइनें खींच रही है। सीमांत क्षेत्रों के लिए चिन्हित 14 सामरिक रेल परियोजना में 495 किलोमीटर लंबे चार ट्रेक उत्तराखंड में प्रस्तावित हैं।
इनमें से केवल एक ऋषिकेश से कर्णप्रयाग पर रेलवे सिर्फ प्रारंभिक सर्वेक्षण करवा पाई है। गौरतलब है कि इन सभी ट्रेक को बिछाने के लिए तीन मंत्रालयों रेल, रक्षा और वित्त में आपसी तालमेल नहीं होना देरी की सबसे बड़ी वजह है। सीमांत क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने के लिए बेशक यह परियोजनाएं बेहद महत्वपूर्ण है।
सेना के लिए प्रस्तावित रेलवे लाइन सामरिक लिहाज से रीढ़ साबित हो सकती हैं। अभी तक सेना और अर्द्धसेना बलों के लिए रसद पहुंचाने से लेकर भारी हथियारों को ले जाने के लिए यातायात का ठोस साधन नहीं हैं।
चीन की स्थिति
सीमा पार चीन तिब्बत क्षेत्र में कुल 58 हजार किलोमीटर रेल और सड़कें बिछा चुका है। चीन के इस क्षेत्र में सैन्य डिवीजन मुख्यालय रेलवे लाइनों से जुड़ रहे हैं।
उत्तराखंड के सभी सीमांत क्षेत्रों तक उसकी रेलव परियोजनाएं या तो पहुंच चुकी हैं या फिर निर्माणाधीन है। ऐसे में चीन सेना अपनी रसद और हथियारों को तेजी से सीमांत इलाकों तक पहुंचा सकता है।
सैन्य विस्तारीकरण को मिलेगा बल
सीमांत क्षेत्रों में सेना और आईटीबीपी की विस्तारीकरण योजनाओं की धीमी रफ्तार यातायात संसाधनों का कमजोर ढांचा है। सेना की कई महत्वपूर्ण योजनाएं उत्तराखंड में प्रस्तावित हैं।
जिसमें सैन्य संख्या बढ़ाने के साथ सेना अपना तोपखाना भी स्थापित करना चाहती है। सेना उत्तराखंड को युद्धाभ्यास क्षेत्र के तौर पर भी इस्तेमाल करना चाहती है।
रेल लाइन तो दूर सड़कें ही नहीं बनी
आजादी के सात दशकों बाद भी सीमांत क्षेत्रों तक सड़क मार्ग नहीं बन पाए हैं। उत्तराखंड में सीमांत इलाकों पर सामरिक लिहाज से महत्वपूर्ण 14 सड़कों का निर्माण वर्ष 2007 में शुरू हुआ, लेकिन यह परियोजनाएं अभी तक लटकी हुई हैं।
साढ़े चार सौ किलोमीटर लंबी सड़कों का 25 फीसदी हिस्सा भी तैयार नहीं हुआ है। सेना और अर्द्धसेना बलों के लिए सीमांत इलाकों तक पहुंचने के लिए अभी तक पोर्टर और घोड़ा खच्चर का सहारा लेना पड़ रहा है।
सामरिक रेल परियोजनाएं
ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच 160 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन।
देहरादून से उत्तरकाशी के बीच 90 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन।
टनकपुर से बागेश्वर के बीच 155 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन।
टनकपुर से जौलजीबी के बीच 90 किलोमीटर लंबा ट्रेक।