देहरादूनः दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग, जूनियर्स के बाल कटवाए, कई घंटे छात्राओं को खड़ा रखा
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला सामने आया है। सीनियर छात्रों ने जूनियर्स के बाल कटवा दिए हैं। वहीं, 23 अगस्त की रात आठ बजे गर्ल्स हॉस्टल में सीनियर छात्राओं ने जूनियर की तीन घंटे तक रैगिंग की। एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी इस मामले की जांच करेगा।
दून मेडिकल कॉलेज मेें जूनियर छात्र काफी परेशान हैं। जूनियर छात्रों के सीनियर छात्रों ने बाल कटवा दिए हैं। रात को हॉस्टल में भी रैगिंग की जा रही है। कई छात्र दबी जुबां में विरोध कर रहे हैं लेकिन अभी लिखित शिकायत सामने नहीं आई है। एक छात्रा ने अमर उजाला को रैगिंग की दूसरी घटना की जानकारी दी। बताया कि 2017 बैच की छात्राओं ने 23 अगस्त की रात आठ बजे से 11 बजे तक गर्ल्स हॉस्टल में रैगिंग की, जिससे वह छात्रा काफी आहत है। छात्रा ने अपने अभिभावकों को इसकी शिकायत की है लेकिन कॉलेज को शिकायत करने में डर रही है।
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग, जांच
राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में एक छात्रा से रैगिंग का मामला सामने आया है। छात्रा ने इसकी शिकायत एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी को भेजी है। छात्रा की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए यूनिवर्सिटी ने निदेशक, चिकित्सा शिक्षा को मामला जांच के लिए भेज दिया है। रैगिंग के मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कॉलेज में एंटी रैगिंग स्क्वाड बनाया गया है। यह छापेमारी कर रहा है। पिछले सप्ताह हमें रैगिंग का शक हुआ था तो हमने सीसीटीवी फुटेज चेक की थी। अब अगर छात्रों के बाल कटवाए गए हैं और छात्राओं की रैगिंग हुई है तो इसकी भी जांच की जाएगी। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। अगर किसी छात्र से रैगिंग हो रही है तो वह हम तक शिकायत जरूर पहुंचाए।
-डॉ. आशुतोष सयाना, प्रिंसिपल, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज की रैगिंग के मामले में हमने छात्रा की शिकायत पर निदेशक चिकित्सा शिक्षा को जांच के लिए पत्र भेज दिया है। जांच के बाद जो भी रिपोर्ट आएगी, उसी हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की भी जांच कराई जाएगी।
-प्रो. हेम चंद्र, कुलपति, एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी
रैगिंग में हो सकती है तीन साल तक सजा
वर्ष 2009 में हिमाचल के धर्मशाला में एक मेडिकल कॉलेज के छात्र अमन काचरू की रैगिंग से मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी शिक्षण संस्थानों में रैगिंग विरोधी कानून सख्ती से लागू करने के आदेश दिए थे। एंटी रैगिंग कानून के तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल की सश्रम कैद हो सकती है। दोषी पर आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।
इसके अलावा रैगिंग के आरोपी छात्र को कॉलेज व हॉस्टल से सस्पेंड या टर्मिनेट किया जा सकता है। उसकी स्कॉलरशिप व बाकी सुविधाओं पर रोक, टेस्ट और एग्जाम पर रोक, रिजल्ट पर रोक, किसी और संस्थान में एडमिशन लेने पर रोक लगाई जा सकती है। इतना ही नहीं रैगिंग के मामले में कार्रवाई न करने या मामले की अनदेखी करने पर कॉलेज के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। कॉलेज पर आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।
यह सभी व्यवहार हैं रैगिंग
-छात्र के रंगरूप या उसके पहनावे पर टिप्पणी की जाए या उसके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई जाए।
-किसी छात्र का उसकी क्षेत्रीयता, भाषा या फिर जाति के आधार पर अपमान किया जाए।
-छात्र की नस्ल या फिर उसके फैमिली बैकग्राउंड पर अभद्र टिप्पणी की जाए।
-छात्रों से उनकी मर्जी के बिना जबरन किसी प्रकार का अनावश्यक कार्य कराया जाए।
रैगिंग होने पर यहां करें शिकायत
अगर किसी छात्र के साथ रैगिंग होती है तो वह उसकी शिकायत अपने कॉलेज के प्रिंसिपल या एंटी रैगिंग टीम को कर सकते हैं। इसके अलावा वह यूजीसी के टोल फ्री नंबर 18001805522 या 155222 पर कॉल कर सकते हैं। उनकी पहचान छिपाकर रखी जाएगी। वह helpline@antiragging.net पर ई-मेल भी कर सकते हैं।