अब अपना रंग रूप नहीं बदलेंगी राधे मां, लाल चोला छोड़ भगवा धारण करने से किया इनकार
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छह वर्षों का निलंबन भोगने के बाद मुंबई की बहुचर्चित महिला संत राधे मां को करीब पंद्रह दिन पूर्व एक बार फिर से जूना अखाड़े ने महामंडलेश्वर पद प्रदान किया था। इसके बावजूद जूना अखाड़े की पहली पेशवाई में राधे मां नहीं पहुंची।
पेशवाई में अखाड़े के करीब 55 महामंडलेश्वर उपस्थित थे। राधे मां के न आने का कारण उनका भगवा धारण न करना बताया जा रहा है। अखाड़ा सूत्रों के अनुसार राधे मां ने रंग रूप बदलने से फिलहाल इनकार कर दिया है।
याद रहे कि राधे मां को वर्ष 2012 में महामंडलेश्वर बनाने के तत्काल बाद निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने हरिद्वार में ही यह पदवी प्राप्त की थी और हरिद्वार से ही जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि ने उनका निलंबन किया था।
लंबे प्रयासों के बाद पंद्रह दिन पूर्व जूना अखाड़ा के आचार्य को लिखित आश्वासन देकर राधे मां की वापसी अखाड़े में हुई। उन्होंने कहा था कि अब न वे नाचेंगी, न फ्लाइंग किस देगी, न रंगीन वस्त्र पहनेंगी और न ही नाचते नाचते भक्तों की गोद में बैठेंगी।
इस आश्वासन के बाद जूना के पंचों ने राधे मां को महामंडलेश्वर पद पुन: प्रदान कर दिया था। उनके लिए जूना अखाड़े के 360 महामंडलेश्वरों के साथ साथ कुंभ के महामंडलेश्वर नगर में भूमि भी आवंटित कर दी गई।
इसके बावजूद राधे मां अखाड़े की प्रतिष्ठा की प्रतीक पेशवाई में नहीं पहुंची। राधे मां की ओर से कहा गया कि वे दस फरवरी को होने वाले कुंभ के तीसरे शाही स्नान में भाग लेंगी। बहरहाल वे भगवा धारण करेगी या नहीं इस बारे में अभी भी संशय बना हुआ है।
जूना अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी विद्यानंद सरस्वती ने उन चर्चाओं को अफवाह करार दिया, जिसमें कहा जा रहा है कि जूना अखाड़ पदवी प्रदान करने के बावजूद राधे मां से डरा हुआ है।
प्रयाग के कुंभ क्षेत्र में यह धारणा फैली हुई है कि राधे मां पेशवाई या स्नान के शाही जुलूस में आई तो उनकी हरकतें जूना अखाड़े को भारी पड़ेंगी। सरस्वती ने बताया कि अखाड़े ने अपने सभी महामंडलेश्वरों के लिए मेला छावनी के महामंडलेश्वर नगर में भूमि आवंटन किया है।
राधे मां आना चाहे तो अभी आकर अपना कैंप लगा सकती हैं। कुंभ का पहला शाही स्नान 14 जनवरी मकर संक्रांति को पड़ रहा है। वे भी उसके शाही जुलूस में ही रथ पर सवार भाग ले सकती हैं। लेकिन उन्हें अखाड़े को दिए वचन के अनुसार अपना रंग रूप बदलकर भगवा धारण करना होगा।
दिए गए आश्वासन के बाद उन्हें मुंबई में ही संन्यासियों के स्वरूप में आ जाना चाहिए था। अखाड़ा अभी भी उनके परिवर्तन की प्रतीक्षा करेगा लेकिन वर्तमान स्वरूप में वे कुंभ में भाग नहीं ले सकती। राष्ट्रीय प्रवक्ता ने बताया कि फिलहाल प्राप्त सूचनाओं के अनुसार राधे मां तीसरे शाही स्नान में आना चाहती हैं।
अखाड़ा इस बात से कोई मतलब नहीं रखता कि वे कब आती हैं। बहरहाल जब भी वो आएं, नागा संन्यासियों की परंपरा के अनुसार भगवा वेश धारण कर कुंभ में पहुंचें। उधर, अखाड़ा सूत्रों के अनुसार जूना अखाड़े की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राधे मां को लिए जाने से व्यापक मतभेद उभर आए हैं।
स्वयं जूना पीठाधीश्वर उनकी वापसी से नाखुश हैं। बहुत संभव है कि महामंडलेश्वर की उपाधि प्राप्त कर लेने के बावजूद राधे मां कुंभ का शाही स्नान कर ही न पाएं। राधे मां के भक्त नहीं चाहते कि वे अपने वस्त्र परिवर्तित कर कुंभ में जाएं।
अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने बताया कि संतों के लिए निर्धारित वेशभूषा का पालन करना उन सभी संतों के लिए अनिवार्य है, जो कुंभ के शाही स्नानों में जमातों में भाग लेते हैं। यह नियम राधे मां के लिए भी है।