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डॉक्टर हैं नहीं, पार्टनर भी छोड़ने लगे साथ
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 25 Jan 2014 11:44 AM IST
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पहाड़ों पर डाक्टरों पहुंचाने के लिए सरकार के लोक निजी सहभागिता में 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित करने की कोशिश को झटका लगने जा रहा है।
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सीएचसी संचालित करने वाली दो संस्थाओं से एक संस्था ने सरकारी कार्यप्रणाली से तंग आकर योजना से हाथ खींचने का फैसला लिया है। संस्थाएं मासिक भुगतान समय पर नहीं होने से परेशान हैं।
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उत्तराखंड पहला राज्य है जिसने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) पर संचालित करने का माडल तैयार किया है, जिस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की नजर है।
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कैबिनेट मिनिस्टर ने किया था उद्घाटन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने अक्टूबर में इस योजना का औपचारिक उद्घाटन किया था। फरवरी और मार्च 2013 में 16 सीएचसी को संचालित करने के लिए दो कंपनियों शील नर्सिंग होम और राजभरा मेडिकेयर को टेंडर आवंटित किए।
इनमें से सात सीएचसी सहिया, रायपुर, नौगांव, गरमपानी, चौखुटिया, बाजपुर और लोहाघाट पूरी तरह से संचालित हो चुकी हैं। नवंबर माह के बाद दोनों संस्थाओं के मासिक बिल वित्त की आपत्ति के बाद रोके गए हैं।
रुके हैं मासिक बिल
राजभरा मेडिकेयर के एमडी रजनीश कश्यप ने बताया कि विभाग ने मासिक बिलों को रोक रखा है, जबकि एमओयू में भुगतान संबंधी स्पष्ट दिशानिर्देश हैं जिसके तहत कटौती संभव है।
समय पर भुगतान न होने से सीएचसी में रखे चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ का वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सेवाएं दे पाना संभव नहीं है। हमने विभाग को इस संबंध में अवगत करवा दिया है।
बिलों में आपत्तियों के चलते रुका है भुगतान
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पीपीपी में संचालित होने वाली संस्थाओं का भुगतान उनके शर्तें पूरी नहीं कर पाने से रुका है। महानिदेशक स्वास्थ्य डा. जेएस पांगती ने बताया कि एक सीएचसी में जितने विशेषज्ञ चिकित्सक होने चाहिए उतने नहीं तैनात हैं।
एनआरएचएम के तहत पीपीपी योजनाओं के बिलों के आडिट की अलग से व्यवस्था लागू की गई है। संस्थाओं के दिए बिलों पर वित्त की आपत्तियां हैं, जिसके स्पष्टीकरण होने के बाद भुगतान किया जाएगा।
पहाड़ों की 12 सीएचसी
पहाड़ी जनपदों में उत्तरकाशी की नौगांव और टिहरी की थोटू, पौड़ी की पावो और थलीसैंण, चंपावत की लोहाघाट, चमोली की गैरसैंण और टिहरी की हिंडोलाखाल, पिथौरागढ़ की मुनस्यारी, बागेश्वर की कपकोट, नैनीताल की गरमपानी और रुद्रप्रयाग की जखोली सीएचसी है। मैदानी जनपदों में देहरादून की सैया और रायपुर, ऊधमसिंह की बाजपुर, हरिद्वार की भगवानपुर शामिल हैं।