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गुरुवार के दिन हुई जनता की खूब फजीहत
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 22 Aug 2014 10:50 AM IST
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आम आदमी के लिए गुरुवार का दिन मुसीबत भरा गुजरा। एक तरफ समाज कल्याण विभाग में हंगामे के चलते काम-काज नहीं हुआ, लोग भटकते रहे।
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उधर, रोडवेज कर्मचारियों के आंदोलन की वजह से बसों का संचालन प्रभावित हुआ। कई रूटों पर बस न मिलने से यात्री भटकने पर मजबूर हुए। कुल मिलाकर फजीहत-ही-फजीहत रही...
जनता की मुसीबत
सरकारी विभागों में कामकाज का ढर्रा सुधारने की मुख्यमंत्री की मुहिम में रोड़े कम नहीं हो पा रहे हैं।
गुरुवार को जहां एक तरफ मुख्यमंत्री हरीश रावत समाज कल्याण विभाग के जरिए समय से वृद्धावस्था, विकलांग और विधवा पेंशन पहुंचाने के लिए जिलाधिकारी को हिदायत दे रहे थे।
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तो दूसरी ओर समाज कल्याण विभाग में काम के दबाव को लेकर किचकिच के बाद कामकाज ही ठप कर दिया गया।
पेंशन, छात्रवृत्ति को भटकते रहे
पेंशन और छात्रवृत्ति के लाभार्थी परेशान घूमते रहे। वृद्धावस्था पेंशन का फार्म जमा कराने आए लोगों को लौटना पड़ा। चुक्खूवाला की पुष्पा बेटी कोमल की छात्रवृत्ति को भटकती रहीं।
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उधर, ऋषिकेश से विकलांग, विधवा और वृद्धावस्था फार्म लेकर आए पार्षद शिवकुमार गौतम दफ्तर बंद होने पर भड़क गए। मसूरी, सहसपुर से आए लोग भी बेहाल रहे।
सीएम ने डीएम से कहा-सख्ती करो
सीएम ने डीएम से वीडियो कांफ्रेंसिंग केजरिए मीटिंग के दौरान कहा कि साल में दो बार समाज कल्याण की पेंशन स्वीकृत किए जाने की पहले से चली आ रही प्रक्रिया के स्थान पर नियमित रूप से नई पेंशन स्वीकृत की जाएं
जिलाधिकारी देखें कि किस स्तर पर पेंशन व प्रमाणपत्र संबंधी आवेदन ज्यादा लंबित हैं। जिम्मेवारी तय करते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
समाज कल्याण की विकलांग, वृद्धावस्था, विधवा पेंशन, तहसील से जारी किए जाने वाले तमाम तरह के प्रमाण पत्रों के संबंध में शिकायतें दर्ज कराने के लिए टोल फ्री नम्बर 1077 की सुविधा शुरू करें।
अधिकारी के डांटने पर कार्य बहिष्कार
वृद्धावस्था, विकलांग और विधवा पेंशन पहुंचाने में सुस्त समाज कल्याण विभाग में गुरुवार को कामकाज ही ठप हो गया। छुट्टी से लौटे प्रवर सहायक को जिला समाज कल्याण अधिकारी के डांटने पर बवाल हो गया। कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार करके धरना, प्रदर्शन और नारेबाजी की।
मिनिस्ट्रीयल फेडरेशन भी आंदोलन में कूद पड़ी। कर्मचारियों का कहना था कि जिला समाज कल्याण अधिकारी के हटाए जाने के बाद ही वे काम पर लौटेंगे। वृद्धावस्था पेंशन सेक्शन के प्रवर सहायक धर्मलाल छुट्टी से लौटे थे। जब वह गुरुवार सुबह समाज कल्याण अधिकारी राम अवतार सिंह के चैंबर में गए तो दोनों में कहासुनी हो गई।
धर्मलाल ने बताया कि जिला समाज कल्याण अधिकारी ने उन्हें जाति सूचक अपशब्द कहे और अभद्रता की। इस पर अधिकारी-कर्मी दफ्तरों का गेट बंद करके बाहर कैंटीन के सामने जमा हो गए।
उनका कहना था कि जिला समाज कल्याण अधिकारी सारे कर्मचारियों से अभद्रता करते रहते हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी का कहना था कि लोग काम नहीं करते। लाभार्थियों की पेंशन खाते में नहीं पहुंच रही। कर्मचारी जब देखो छुट्टी ले लेते हैं। धर्मलाल से काम करने के लिए कहा तो मना कर दिया।
इससे आक्रोशित कर्मचारी सीडीओ कार्यालय शिकायत करने पहुंचे। सीडीओ के न मिलने पर वे उत्तरांचल फेडरेशन आफ मिनिस्ट्रीयल सर्विसेस एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मिले।
फेडरेशन के जिलाध्यक्ष सुनील जोशी की अगुवाई में पदाधिकारी समाज कल्याण विभाग पहुंचे। वहां धरने पर बैठ गए और सभा की। मामले की शिकायत विभाग के निदेशक रणवीर सिंह चौहान से भी की गई।
धर्मलाल बिना बताए छुट्टी पर चले गए थे। उनसे मुख्यमंत्री के विशेष अभियान के दौरान बनाए गए पेंशन लाभार्थियों के संबंध में रिपोर्ट मांगी तो बता नहीं रहे थे। मैंने डांटा जरूर है। काम न होने पर डांटूंगा ही। लेकिन मैंने अपशब्द नहीं कहे और न ही अभद्रता की। मैं कुरसी से उठा तक नहीं।
- राम अवतार सिंह जिला समाज कल्याण अधिकारी
मेरे पिताजी बीमार हैं। एक रिश्तेदार भी बीमार थे। अर्जेंट जाना पड़ा है। सबको बता दिया था। छुट्टी लेकर गया था। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने जाति सूचक अपशब्द कहे। ऐसा व्यवहार वे सब के साथ करते हैं। काम करने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन सम्मान से बात करें।
- धर्मलाल, प्रवर सहायक वृद्धावस्था पेंशन सेक्शन
बसें गायब, यात्री बेहाल
जनता की परेशानियों का कोई पारावार नहीं था। समाज कल्याण विभाग ने तो जनता को तकलीफ दी ही, परिवहन निगम कर्मचारियों का आंदोलन भी उस पर भारी पड़ा।
अस्सी फीसदी कर्मचारियों के प्रदर्शन में शामिल होने के कारण बसों को संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस कारण यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। गुरुवार को सुबह से ही कुमाऊं मंडल के नैनीताल, हल्द्वानी, पिथौरागढ़, टनकपुर आदि रूटों पर बसों का संचालन ठप रहा।
उधर, दिल्ली रूट पर भी बसों की संख्या कम रही। दोपहर को कुछ बसें जरूरी चली, लेकिन यात्रियों की संख्या के कारण परेशानी बनी रही। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के क्षेत्रीय प्रबंधक केपी सिंह ने बताया गुरुवार को केवल बीस फीसदी बसों का संचालन हो पाया।