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उत्तराखंड के 1180 भवनों पर यूपी का कब्जा
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Tue, 02 Sep 2014 01:55 PM IST
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उत्तर प्रदेश के बंटवारे के बाद हरिद्वार भले ही उत्तराखंड में आ गया है लेकिन यहां की संपत्तियों पर यूपी का कब्जा अब तक बना हुआ है।
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वीआईपी घाट से मिटा दिया उत्तराखंड का नाम
गंगा का अधिकतर पानी नहर के जरिए यूपी की सिंचाई के काम आ रहा है। अन्य संपत्तियों पर भी यूपी कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं है। हरकी पैड़ी के सामने वीआईपी घाट से उत्तराखंड का नाम तक मिटा दिया गया है। इतना ही नहीं उत्तराखंड में स्थित 1180 भवनों पर यूपी का कब्जा अब तक बना हुआ है।
हरिद्वार जिले में स्थित सिंचाई विभाग के 1064 आवासीय भवनों पर यूपी काबिज है। रिटायर हो चुके यूपी के कर्मचारियों तक ने कब्जा नहीं छोड़ा है। कुछ ने कब्जाए आवासों को बाहरी लोगों को बेच दिया है। जबकि उत्तराखंड सिंचाई विभाग के कर्मचारी आवास के लिए अब तक भटक रहे हैं।
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14 निरीक्षण भवन और एक नहर अस्पताल यूपी के पास है। 25 कार्यालय भवनों में यूपी के अधिकारी-कर्मचारी बैठते हैं। 39 स्टोर भी इन्हीं के काम आ रहे हैं। नौ फील्ड हॉस्टल, तीन गैराज, 24 अस्थाई शेड और एक वर्कशाप पर यूपी का कब्जा है।
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जबकि डामकोठी क्षेत्र के कई आवास नहर चौड़ीकरण की भेंट चढ़ा दिए हैं। लेकिन उत्तराखंड का शासन-प्रशासन यूपी के सामने बौना बना बैठा है। आरोप तो यहां तक है कि यूपी के कर्मचारी गंगा किनारे की जमीनों पर अवैध कब्जा कराकर मोटी कमाई भी कर रहे हैं। गंगा से रातदिन सैकड़ों घोड़ा बुग्गियों, खच्चरों से रेत, बजरी निकाली जा रही है।
सुप्रीमकोर्ट के आदेश की भी अवमानना
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सिंचाई विभाग की परिसंपत्तियों पर मनमानी कर रहा है। सुप्रीमकोर्ट ने वर्ष 2009 में परिसंपत्तियों का बटवारा होने तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे।
लेकिन इस आदेश की अवमानना करते हुए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग मायापुर में स्कैब चेनल का निर्माण, नहर चौड़ीकरण का कार्य करवा रहा है। लेकिन उत्तराखंड के अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
सुप्रीमकोर्ट के यथास्थिति के आदेश के बाद भी यूपी द्वारा उत्तराखंड के नियंत्रणाधीन भूमि पर मायापुर में स्कैप चेनल का निर्माण कराने में उत्तराखंड सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों की मिलीभगत और चुपी सामने आई है।
राज्य सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल ने एक अपील की सुनवाई में इस बात को पकड़ा कि सुप्रीमकोर्ट ने जुलाई 2009 में परिसंपत्तियों को बंटवार होने तक यथास्थिति का आदेश दिया था। इसके बाद सितंबर 2013 में अंतिम आदेश दिया और यथास्थिति का आदेश बनाए रखा।
जबकि यूपी ने इससे पहले खुदाई शुरू करा दी थी। यदि उत्तराखंड के अधिकारी सुप्रीमकोर्ट के संज्ञान में इसको लाते तो वह यूपी के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई जरूर करते। लेकिन अधिकारी चुप हैं। न ही शासन को बताया जा रहा है कि यूपी सुप्रीमकोर्ट की अवमानना कर रहा है।
निशंक के विरोध का भी असर नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार के सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से जारी नहर चौड़ीकरण समेत कई अन्य कार्यों के विरोध में एक बार अधिकारियों की बैठक और दो बार पत्रकार वार्ता कर चुके हैं। लेकिन इसका असर यूपी के अधिकारियों पर नहीं हुआ। नहर चौड़ीकरण का काम जारी है।