धर्मनिरपेक्ष ताकतों की जीत, सांप्रदायिक ताकतों की हार: टम्टा
- राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद प्रदीप टम्टा ने केंद्र, भाजपा पर बोला हमला
- कहा, धनबल के दम पर राज्य में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना चाहती है भाजपा
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नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा है कि चुनाव में उनकी जीत धर्मनिरपेक्ष ताकतों की जीत और सांप्रदायिक ताकतों की हार है। नवनिर्वाचित सांसद ने कहा कि भाजपा धनबल के बूते राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर चुनाव जीतना चाहती थी, लेकिन उसे हर बार मुंह की खानी पड़ी।
टम्टा ने कहा कि उत्तराखंड का विकास उनकी प्राथमिकताओं में है। 2009 में अल्मोड़ा संसदीय सीट से चुनाव जीतने के बाद वह उत्तराखंड के विकास का मुद्दा संसद में लगातार उठाते रहे हैं। कहा कि उत्तराखंड समेत देश के 11 हिमालयी राज्यों के विकास का मुद्दा वह एक बार फिर पुरजोर तरीके से उठाएंगे, ताकि इन राज्यों को विकसित किया जा सके।
नवनिर्वाचित सांसद ने कहा कि उनकी पहल पर ही केंद्र सरकार ने चतुर्वेदी कमेटी का गठन किया था, जिसमें उत्तराखंड समेत तमाम हिमालयी राज्यों के विकास के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपोर्ट की संस्तुतियों को नए सिरे से लागू कराने का पूरा प्रयास होगा। राज्यसभा चुनाव को लेकर कहा कि भाजपा ने परंपरा तोड़ी है।
गीता ठाकुर के बहाने भाजपा को बताया दलित महिला विरोधी
इससे पूर्व राज्य में जब भी राज्यसभा चुनाव हुए और कांग्रेस पार्टी ने यह पाया कि वह बहुमत में नही तो पार्टी ने प्रत्याशी खड़ा ही नहीं किया। लेकिन भाजपा ने यह जानते हुए कि उसके पास पर्याप्त बहुमत नहीं है, इसके बावजूद एक नहीं, दो-दो प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा।
भाजपा ने दलित महिला को पहले तो समर्थन देकर प्रत्याशी बनाया और फिर ऐन वक्त पर समर्थन देने से इनकार कर दिया। यह दलित महिला अपमान है।
नवनिर्वाचित सांसद ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर राज्य का विकास कराया जाएगा। उत्तराखंड की जनता से जुड़े मुद्दों को राज्यसभा में प्रमुखता से उठाया जाएगा। कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कोऑपरेटिव फेडरलिज्म के वह पक्षधर हैं, लेकिन इसे पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाना चाहिए। सांसद टम्टा ने जीत के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ ही आला पार्टी नेताओं, उत्तराखंड की जनता, पीडीएफ नेताओं का आभार जताया है।