उत्तराखंड में निजी हाथों में दिया बिजली वितरण
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बिजली उत्पादन बढ़ाने में आ रही कानूनी अड़चन को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने बिजली बचत (चोरी) और होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई की तैयारी कर ली है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रयोग के तौर पर काशीपुर और रुड़की में बिजली वितरण का जिम्मा निजी कम्पनियों को सौंपने का फैसला लिया गया है। इसके लिए सरकार ने दिल्ली और आगरा मॉडल का परीक्षण कराया है।
मंत्रिमंडल ने बिजली वितरण का काम निजी हाथों में सौंपने का फैसला बाकयदा मैदानी जिलों में सर्वे केबाद लिया है। राज्य के ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिलों में जितनी बिजली लॉस (चोरी) हो रहा है उतनी खपत अन्य पर्वतीय जिलों की है।
बदले जाएंगे ट्रांसफार्मर, तार और पोल
इन दोनों जिलों में काशीपुर और रुड़की दो ऐसी तहसीलें हैं जहां बिजली चोरी सर्वाधिक है और बिलों की वसूली सबसे कम है।
विभाग की मानें तो बिजली वितरण का काम निजी हाथों में जाने से इन इलाकों में न सिर्फ बिजली चोरी रोककर वसूली बढ़ाई जा सकेगी।
बल्कि यहां सालों से खस्ताहाल पुराने ट्रांसफार्मर तार और पोल आदि भी बदले जा सकेंगे। इस व्यवस्था से बिजली कटौती और फाल्ट भी कम होंगे। इसका सीधा लाभ उन उपभोक्ताओं को मिलेगा जो बिजली बिल का भुगतान करते हैं।
निजी कंपनियों सरकार से बिजली खरीदेंगी और वितरण करेंगी। दो इलाकों में शुरू किया गया प्रयोग अगर सफल होता है तो जल्द ही इसे पूरे जिले में बढ़ा दिया जाएगा। विभाग का मानना है कि दिल्ली में वितरण का काम निजी कंपनियों को सौंपने से पहले वहां पचास फीसदी से अधिक बिजली का नुकसान चोरी लाइन लॉस से हो रहा था।