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उत्तराखंड ने भुगती दिल्ली की गलती की सजा
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 01 Oct 2014 12:35 PM IST
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नार्दर्न रीजन लोड डिस्पैच सेंटर (एनआरएलडीसी) की चूक उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं पर भारी पड़ी।
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उद्योगों को उठाना पड़ा भारी नुकसान
गलत आंकड़ों के आधार पर डिस्पैंच सेंटर के शटडाउन लेने से हरिद्वार जिले में एक घंटे बिजली गुल रही। इससे उद्योगों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। एनआरएलडीसी के कटरिया सराय, नई दिल्ली के शिफ्ट इंचार्ज ने मंगलवार सुबह साढ़े छह बजे सेंटर को गलत आंकड़े दे दिए।
बताया गया कि उत्तराखंड पुहाना-रुड़की लाइन पर विद्युत ग्रिड से 50 मेगावाट अधिक बिजली खींच रहा है। इस पर एनआरएलडीसी ने इस लाइन पर तुरंत शटडाउन ले लिया।
जबकि उस समय उत्तराखंड निर्धारित से 50 मेगावाट कम बिजली ले रहा था। चूक पता लगने पर एक घंटे बाद एनआरएलडीसी ने शटडाउन को नार्मल कर दिया।
उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एसएस यादव ने इस मामले को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय में चल रही बैठक में उठाया। एमडी ने कहा कि गलत सूचनाओं के आधार पर उत्तराखंड की बिजली काटी जा रही है।
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मेघालय से लेकर अगले साल लौटाएंगे बिजली
बैंकिंग योजना के तहत उत्तराखंड एक से 31 अक्तूबर तक मेघालय से प्रतिदिन 25 मेगावाट बिजली लेगा। ऊर्जा निगम मेघालय को यह बिजली जुलाई, अगस्त और सितंबर 2015 में लौटाएगा।
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निगम के प्रवक्ता मधुसूदन ने बताया कि सर्दियों में होने वाली बिजली समस्या को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। टाटा पावर, मित्तल पावर, पीटीसी, जीएमआर, जेपीएल कंपनियों से भी बिजली खरीदी गई है।
पांच घंटे तक हुई बिजली कटौती
देहरादून। मंगलवार को राज्य में विद्युत मांग तीन करोड़ 43 लाख 10 हजार यूनिट रही। जबकि सभी स्रोतों से तीन करोड़ 10 लाख 70 हजार यूनिट बिजली उपलब्ध हो पाई।
ऐसे में ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में साढ़े चार घंटे, गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के छोटे शहरों में ढाई घंटे, रुड़की, काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी और ज्वालापुर में दो घंटे, हरिद्वार और ऋषिकेश में एक घंटे, नान कंटीनियस इंडस्ट्री गढ़वाल, कुमाऊं और सिडकुल में पांच घंटे के साथ ही राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में दो घंटे की बिजली कटौती की।