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राजनीतिक अस्थिरता ने बिगाड़े प्रदेश में हालात
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 27 Mar 2016 07:39 PM IST
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हरीश रावत
- फोटो : AmarUjala
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राज्य गठन के बाद प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता से हालात बिगड़े हैं। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार रही हो या फिर कांग्रेस लगातार मुखियाओं के बदलने से पहाड़ के विकास पर इसका प्रभाव पड़ रहा है। खासकर पलायन, स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर 15 साल बाद भी समस्याएं बरकरार हैं। जानकारों का कहना है कि इस तरह की स्थिति प्रदेश की जनता के लिए घातक है।
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15 सालों में मॉडल तय नहीं
पर्यावरणविद् एवं पद्मश्री अनिल जोशी के मुताबिक पिछले 15 सालों में विकास का मॉडल क्या होगा अब तक यह तय नहीं हो पाया। किसी मुख्यमंत्री ने हर्बल तो किसी ने ऊर्जा प्रदेश के दावे किए, लेकिन पहाड़ से पलायन की समस्या बरकरार है। गांव के गांव खाली हो चुके हैं। तीन हजार गांव पूरी तरह से खाली हो चुके हैं। पहाड़ में डॉक्टर और मास्टर नहीं हैं।
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छोटे राज्य के लिए यह घातक
हार्क संस्था के महेंद्र कुंवर बताते हैं कि नये और छोटे राज्य के लिए यह स्थिति घातक है। आठ से दस लोग मिलकर प्रदेश को अस्थिर कर रहे हैं। लगातार मुखियाओं के बदलने से जल, जंगल, जमीन को लेकर नीतियां नहीं बन पा रही हैं।
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उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के भविष्य को लेकर कोई चिंतित नहीं है। जब जनता के दरबार में मामला जाने वाला था तो स्थिर सरकार को अस्थिर कर दिया गया। राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी कहती हैं कि जब तक सोच सही नहीं होगी कुछ होने वाला नहीं है। पहाड़ से पलायन की समस्या वर्षों बाद भी बरकरार है।