दून के नकरौंदा हत्याकांड की पूरी कहानी
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देहरादून के नकरौंदा में सहायक कृषि अधिकारी सुरेंद्र सिंह थपलियाल के घर में डकैती और बेटे की हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारे पास के जंगल में छह घंटे तक छिपे रहे, जबकि पुलिस बाहर ही बाहर घूमकर निकल गई। बाद में बदमाश हाइवे से सिटी बस में सवार होकर डोईवाला और वहां से मैक्स द्वारा हरिद्वार पहुंचे।
घटना में शामिल रहे आरोपी नदीम की इस कहानी ने पुलिस को फिर सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। जाहिर है कि यदि उस समय कांबिग अथवा चेकिंग में सख्ती होती तो बदमाश तभी पकड़े जाते।
रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में डीजीपी बीएस सिद्धू ने वारदात का खुलासा किया। उन्हाेंने बताया कि बिजनौर पुलिस ने नगीना में हुई वारदात के मामले में बिजनौर निवासी शहजाद उर्फ यामीन और अनीस निवासी मंगलौर को पकड़ा था।
पूछताछ में शहजाद ने नकरौंदा कांड का भी खुलासा किया था। शहजाद के साथ घटना में शामिल रहे नदीम को दून पुलिस ने उसके गांव मोहितपुर भगवानपुर से दबोचा लिया।
नदीम ने किया हत्याकांड का खुलासा
प्रेस वार्ता में नदीम ने बताया कि तड़के करीब साढ़े तीन बजे घटना को अंजाम देने के बाद सभी नाला पार कर जंगल में छिप गए थे। घटना के पंद्रह मिनट बाद ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस और लोग कई घंटे तक जंगल के ईद-गिर्द घूमते रहे, लेकिन अंदर कोई नहीं आया।
अंदर बैठे बदमाशों की सांसे भी अटकी रही, लेकिन आखिर वह भागने में कामयाब रहे। सुबह दस बजे के बाद वह एक-एक कर हाइवे पर आ गए। डोईवाला तक सिटी बस में सफर किया। वहां से मैक्स में हरिद्वार गए और फिर बस में सहारनपुर निकल गए। नदीम ने दावा किया बिजनौर में पकड़ा गया शहजाद तो घटना में शामिल था, लेकिन अनीस उनके साथ नहीं था।
चार बदमाशों की तलाश में दबिश
डीजीपी बीएस सिद्धू ने कहा कि शहजाद और नदीम के पकड़े जाने के बाद साजिद निवासी झबरेड़ा, साजिद पहलवान निवासी मानकमउ सहारनपुर, अकरम उर्फ मुच्छड बुंटा थानाभवन शामली, अखलाक निवासी रोशनाबाद हरिद्वार की तलाश की जा रही है। अपर पुलिस महानिदेशक राम सिंह मीणा, एसएसपी अजय रौतेला, एसपी सिटी अजय सिंह इस दौरान उपस्थित रहे।
अंकित ने छीन ली बंदूक, इसलिए मारा
नदीम ने बताया कि खिड़की की ग्रिल निकालकर और जाली काटने के बाद साजिद उर्फ मोटा अकेले ही सहायक कृषि अधिकारी के घर में घुसा था। इसी बीच अंदर से आवाजें सुनाई दी तो बाकी बदमाश भी खिड़की से ही अंदर घुस गए।
शोर मचा रहे थपलियाल और उनकी पत्नी अंजनि को चुप कराने के लिए बदमाशों ने उनके सिर पर रॉड से वार किया था। इसी बीच आए उनके बेटे अंकित थपलियाल ने हाथापाई करते हुए अकरम उर्फ मुच्छड़ से मसकट (छोटी बंदूक) छीन ली थी।
इसके बाद बदमाशों ने डंडा मारकर अंकित से बंदूक छीनी। लेकिन, हाथापाई में अंकित भारी पड़ने लगा तो अकरम ने उसे गोली मार दी। नदीम की मानें तो वह घर में करीब 20 मिनट रहे।
एक लाख के इनाम की संस्तुति
डीजीपी ने कहा कि एडीजी कानून व्यवस्था राम सिंह मीणा के निर्देशन और एसएसपी अजय रौतेला और एसपी सिटी अजय सिंह की अगुवाई में काम करने वाली 38 पुलिसकर्मियों की टीम को 20 हजार रुपये का इनाम दिया जा रहा है। साथ ही एक लाख रुपये के पुरस्कार के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत को संस्तुति भेजी जा रही है।
अखलाक के न्यौते पर आए थे बदमाश
हरिद्वार के रोशनाबाद निवासी अखलाक डोईवाला में किराए पर रहकर मिट्टी, रेत्त, बजरी आदि सामान सप्लाई करता है। अखलाक ने अपने बहनोई साजिद निवासी सहारनपुर के साथ मिलकर इलाके में लूट की योजना बनाई थी।
9 सितंबर को सहारनपुर से एकत्र होकर यह लोग रात दस बजे के करीब बस से आईएसबीटी पहुंचे। यहां से हर्रावाला तक 250 रुपये में ऑटो किराए पर लिया था। अखलाक ही उन्हें जंगल के रास्ते घटनास्थल तक लाया था।
एक नहीं दो बदमाश हुए थे घायल
डकैती और हत्या के दौरान एक नहीं दो बदमाश घायल हुए थे। नदीम तो साजिद के डंडे से घायल हुआ था। परिजनों को डंडा मारते हुए गलती से नदीम के सिर पर लग गया था, जिससे उसका सिर फट गया था। जबकि दीवार फांदते साजिद का हाथ ग्रिल से कट गया था। हालांकि, नदीम का कहना था कि वह फैक्ट्री के पास नहीं रुका था और न ही उसका खून सड़क पर बिखरा था।
ना-ना करते दिया बिजनौर पुलिस को श्रेय
डीजीपी बीएस सिद्धू नकरौंदा खुलासे का श्रेय बिजनौर पुलिस को देने से बचते रहे। प्रेस कांफ्रेंस के शुरुआती दौर में वह दून पुलिस की तारीफ करते रहे।
सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि एक बदमाश बिजनौर पुलिस ने पकड़ा है तो दूसरा दून पुलिस ने। उन्होंने कहा कि शुरुआती सूचना बिजनौर पुलिस की थी। यह कहा जा सकता है कि संयुक्त आपरेशन में यह सफलता मिली है।
मुखबिरी से पकड़े गए बदमाश
नकरौंदा कांड के बाद इस गिरोह ने किसी और वारदात को अंजाम नहीं दिया था लेकिन बिजनौर के छुटभैय्या अपराधियों को भनक लग गई थी कि शहजाद अपने साथियों के साथ कोई बड़ी घटना करके आया है।
इसी मुखबिरी के आधार पर बिजनौर पुलिस उसके पीछे लगी थी। सर्विलांस के जरिए यह पता चला कि शहजाद गैंग ने नगीना में भी लूट की थी। शहजाद के पकड़े जाने के बाद ही नकरौंदा की घटना का खुलासा हो सका।