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रूबी प्रकरण: अपने ही बनाए चक्रव्यूह में फंस गया पीएचक्यू

Sat, 16 May 2015 03:03 PM IST
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 16 May 2015 03:03 PM IST
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police in shameful condition in ruby chaudhary case.

एलबीएस IAS एकेडमी मसूरी प्रकरण में राज्य पुलिस महानिदेशालय खुद अपने ही बनाए गए चक्रव्यूह में फंस गया है। उम्मीद नहीं थी कि पीएचक्यू के रणनीतिकारों की सीबीआई जांच का प्रस्ताव खारिज होगा।

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हालांकि पीएचक्यू के प्रस्ताव पर पहले दिन से ही तमाम सवाल उठ रहे थे। लेकिन अब राज्य पुलिस किस मुंह से इस प्रकरण की जांच करेगी, यह बड़ा सवाल है।

विगत छह मई को जब डीजीपी बीएस सिद्धू ने एलबीएस रूबी चौधरी प्रकरण की जांच सीबीआई को कराने के प्रस्ताव शासन को भेजा तो पीएचक्यू की कार्य क्षमता पर ही सवाल खडे़ हो गए। प्रस्ताव भेजते ही आनन फानन में मीडिया कर्मियों को इसकी जानकारी भी दे दी गई।
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जालसाजी के किसी मामले को सीबीआई को भेजा जाना खुद में पुलिस की नाकाबलियत का नमूना था। शासन को भेजे गए तर्क भी बेदम थे।

सीबीआई को प्रस्ताव भेजने पर उत्तराखंड पुल‌िस पर उठे सवाल

police in shameful condition in ruby chaudhary case.

सवाल यह था कि 38 दिन की विवेचना में जब पुलिस की एसआईटी ने आरोपी महिला रूबी चौधरी व एक गार्ड को जेल भेज दिया गया। पुलिस के लिए विवेचना में सबसे मुश्किल काम आईएएस सौरभ जैन से पूछताछ करना था। वह भी कर लिया गया। फिर भी सीबीआई को जांच के लिए भेजना सवाल खड़े कर रहा था।

लेकिन इस जांच को सीबीआई को रेफर करने के पीछे क्या मंशा थी, यह भी लाख टके का सवाल है। आखिर विवेचना करने के दौरान ऐसे कौन से तथ्य सामने आए कि जांच से हाथ खड़े कर दिए गए।

क्या कहते हैं जानकार
मुख्यमंत्री का निर्णय सही और औचित्यपूर्ण है। गंभीरता के साथ विवेचना करने के बजाय इस मामले को हाईप्रोफाइल बनाने की ज्यादा कोशिश की। सीबीआई जांच की सिफारिश इस केस से जल्दबाजी में पीछा छुड़ाने को प्रयास ही था। जब कोई जघन्य अपराध ही नहीं है तो इसे सीबीआई जांच कराकर पीछा छुड़ाना ही कहा जाएगा। सिविल पुलिस के विवेचक इतने बड़े मामलों की विवेचना करते हैं तो फिर इस जालसाजी के सामान्य मामले को सीबीआई को देने की सिफारिश क्यों हुई यह समझ से परे है।
-जेएस पांडे, पूर्व डीजीपी उत्तराखंड

पुल‌िस ने बना ली थी धारणा

police in shameful condition in ruby chaudhary case.

विवेचना का मतलब तथ्यों को सामने लाना होता है, लेकिन यह प्रयास नहीं किया गया। यह ऐसा मामला है जिसकी जांच पुलिस का कोई भी विवेचक कर सकता है। लेकिन पुलिस विभाग ने शायद यह धारणा बना ली थी कि मामले को सीबीआई भेज दिया जाए।
-जीवन चंद्र पांडेय, रिटायर्ड आईजी

यह था मामला
मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में 27 मार्च को मुजफ्फरनगर के कुटबी निवासी रूबी चौधरी के फर्जी तरीके से प्रशिक्षु आईएएस के रूप में रहने का खुलासा होने के बाद खलबली मच गई थी।

सुरक्षा अधिकारी के मुकदमा दर्ज कराने के बाद रूबी की गिरफ्तारी हुई थी। एसआईटी ने भागदौड़ कर साक्ष्यों का संकलन भी किया, लेकिन इसी बीच विवेचना सीबीआई से कराने की संस्तुति के बाद मामला अधर में लटक गया है।

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