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Dehradun News: बुधवार को हटाए पाइप, दो दिन बाद फिर लगे
Fri, 30 Oct 2026 08:08 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Fri, 30 Oct 2026 08:08 PM IST
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- माजरी में दोबारा आरसीसी पाइप और आरबीएम भराव की जीपीएस तस्वीरें आईं सामने
- किसानों के खेतों की सिंचाई और सार्वजनिक रास्तों का मामला भी उठाया
संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। तहसील क्षेत्र के जाटोवाला-माजरी में प्राकृतिक जल निकासी मार्ग से आरसीसी ह्यूम पाइप हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के दो दिन बाद उसी क्षेत्र में दोबारा पाइप और पत्थर-मिट्टी (आरबीएम) का भराव मिलने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता जुबैर ने शुक्रवार को जीपीएस लोकेशन और समय के साथ खींची गई तस्वीरें प्रशासन को उपलब्ध कराते हुए मामले में तत्काल जांच की मांग की है। तस्वीरों में प्राकृतिक जल निकासी क्षेत्र के आसपास आरसीसी पाइप और पत्थर-मिट्टी का जमाव दिखाई दे रहा है।
शिकायतकर्ता जुबैर के अनुसार बुधवार को राजस्व प्रशासन ने मौके से पाइप हटवाए थे। इसके बावजूद दोबारा पाइप रखने और भराव किए जाने से प्राकृतिक जलप्रवाह प्रभावित होने की आशंका है। मामले में जिलाधिकारी की ओर से जून में बहुविभागीय जांच के निर्देश दिए गए थे। वहीं, भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की 21 अक्तूबर की रिपोर्ट में पुराने और वर्तमान जलप्रवाह मार्ग के बीच औसतन 10 से 12 मीटर का अंतर सामने आया है। रिपोर्ट में इसकी वैज्ञानिक व्याख्या के लिए यूएसएसी अथवा आईआईआरएस से तकनीकी अध्ययन कराने का सुझाव दिया गया है। शिकायतकर्ता ने प्राकृतिक जलमार्गों का सीमांकन, अवरोध हटाने और किसानों के सार्वजनिक खेत-रास्तों की बहाली के लिए संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की है।
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- किसानों के खेतों की सिंचाई और सार्वजनिक रास्तों का मामला भी उठाया
संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। तहसील क्षेत्र के जाटोवाला-माजरी में प्राकृतिक जल निकासी मार्ग से आरसीसी ह्यूम पाइप हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के दो दिन बाद उसी क्षेत्र में दोबारा पाइप और पत्थर-मिट्टी (आरबीएम) का भराव मिलने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता जुबैर ने शुक्रवार को जीपीएस लोकेशन और समय के साथ खींची गई तस्वीरें प्रशासन को उपलब्ध कराते हुए मामले में तत्काल जांच की मांग की है। तस्वीरों में प्राकृतिक जल निकासी क्षेत्र के आसपास आरसीसी पाइप और पत्थर-मिट्टी का जमाव दिखाई दे रहा है।
शिकायतकर्ता जुबैर के अनुसार बुधवार को राजस्व प्रशासन ने मौके से पाइप हटवाए थे। इसके बावजूद दोबारा पाइप रखने और भराव किए जाने से प्राकृतिक जलप्रवाह प्रभावित होने की आशंका है। मामले में जिलाधिकारी की ओर से जून में बहुविभागीय जांच के निर्देश दिए गए थे। वहीं, भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की 21 अक्तूबर की रिपोर्ट में पुराने और वर्तमान जलप्रवाह मार्ग के बीच औसतन 10 से 12 मीटर का अंतर सामने आया है। रिपोर्ट में इसकी वैज्ञानिक व्याख्या के लिए यूएसएसी अथवा आईआईआरएस से तकनीकी अध्ययन कराने का सुझाव दिया गया है। शिकायतकर्ता ने प्राकृतिक जलमार्गों का सीमांकन, अवरोध हटाने और किसानों के सार्वजनिक खेत-रास्तों की बहाली के लिए संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की है।
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