विकलांग बेटियों को मिलेगी जन्म से पेंशन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विकलांग बेटियों को उत्तराखंड सरकार अब जन्म से ही पेंशन देगी। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यह घोषणा की।
कहा कि हर बालिका स्वस्थ हो यह अभिभावकों और सरकार का दायित्व है। लेकिन, यदि कोई बच्ची किसी वजह से शारीरिक, मानसिक रूप से अक्षम हो तो प्रदेश सरकार उसका सहारा बनेगी। विधानसभा सत्र में इस समेत बालिकाओं-महिलाओं को समर्पित चार योजनाओं की शुरुआत की जाएगी।
रविवार को मुख्यमंत्री जनरल महादेव सिंह रोड स्थित एक होटल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल, विधायक उमेश शर्मा, राजकुमार, राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष प्रमोद कुमार, जिला पंचायत सदस्य राजेश परमार, जिला पंचायत सदस्य हेमा पुरोहित, पूर्व प्रधान मोथरोवाला मामचंद आदि मौजूद रहे।
ये योजनाएं होंगी प्रारंभ
- उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में बुजुर्ग महिलाओं को निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जाएगी
- हमारे बुजुर्ग हमारे तीर्थ योजना में 25 हजार बुजुर्गों को निशुल्क यात्रा कराई जाएगी
- सातवीं कक्षा से स्नातक तक पढ़ाई के साथ ही बच्चों को हुनर की शिक्षा दी जाएगी, इसके लिए ताईवान की एक संस्था से
करार की तैयारी है
- गर्भवती महिलाओं को आयरन एवं प्रोटीन के साथ ही एक किलोग्राम आयोडीनयुक्त नमक उपलब्ध कराया जाएगा
- हल्द्वानी और देहरादून में गर्भवती महिलाओं के लिए समर्पित चिकित्सा वार्ड प्रारंभ करने किए जा रहे हैं, दाई प्रशिक्षण योजना भी शुरू की जाएगी
किसान बेटी का किया सम्मान
गरीब क्रांति अभियान के चकबंदी समारोह के दौरान किसान बेटी विनीता को सम्मानित किया। कभी पिता से शौकिया ट्रैक्टर चलाना सीखने वाली विनीता आज दून में खेतों पर ट्रैक्टर चलाकर ही अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही है।
मूलत: पौड़ी के यमकेश्वर ब्लाक की रहने वाली विनीता बिष्ट के पिता देवेंद्र सिंह बिष्ट रायपुर में लोगों के खेतों पर ट्रैक्टर चलाते थे। विनीता भी पिता संग खेतों पर जाती और खेल-खेल में उसने ट्रैक्टर चलाना सीख लिया।
वर्ष 2011 में विनीता की बड़ी बहन की सर्गाई के दिन अचानक पिता का निधन हो गया। परिवार में बहन, भाई और मां का जिम्मा विनीता ने अपने ऊपर ले लिया। पिता चले गए तो विनीता ने ट्रैक्टर का स्टीयरिंग थाम लिया। खेतों में ट्रैक्टर चलाकर उसने अपनी कमाई के बूते न सिर्फ बहन की शादी करवाई, अपनी और छोटे भाई की पढ़ाई भी जारी रखी।
एमए अंग्रेजी कर चुकी विनीता फिलहाल हरिद्वार में इंडसइंड बैंक में बतौर फाइनेंस एक्जीक्यूटिव कार्यरत हैं, लेकिन अब भी अप्रैल, मई, जून और नवंबर-दिसंबर में वह खेतों में ट्रैक्टर चलाती हैं। विनीता का कहना है कि उनकी जिंदगी खेतों और ट्रैक्टर से ही संभली है। ऐसे में वह यह काम नहीं छोड़ सकतीं।
अमर उजाला ने किया 75 महिलाओं का सम्मान
अमर उजाला और उत्तराखंड शासन की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय और सराहनीय काम करके मील का पत्थर बनने वाली 75 महिलाओं को सम्मानित किया गया।
समारोह में कनक कला केंद्र की भरतनाट्यम गुरु वीणा अग्रवाल और उनकी पुत्री श्रुति ने अपनी टीम के साथ गंगा संरक्षण पर शानदार प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति को समारोह में मौजूद सभी लोगों ने काफी सराहा। रविवार को जीएमएस रोड स्थित होटल सन पार्क इन में आयोजित समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दीप जलाकर किया।
उन्होंने सभी महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं दी। इसके बाद महिलाओं को बारी-बारी से सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में न केवल समाजसेवा से नए आयाम बनाने वाली महिलाएं थी, बल्कि अपनी प्रतिभा के दम पर अलग पहचान बनाने वाली महिलाएं भी शामिल थीं।
कई ऐसी महिलाएं भी सम्मानित की गईं, जिन्होंने समाज की रूढ़िवादी बेड़ियां तोड़कर आदर्श स्थापित किए हैं। इस अवसर पर भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।
सम्मानित होने वाली महिलाएं
अधिकारी वर्ग : सराहनीय सेवाएं
स्वीटी अग्रवाल, ममता वोहरा, कमलेश उपाध्याय, झरना कमठान, गीता गैरोला, मेघा मदान, दीपिका राणा, नीलम रावत, संध्या रानी, सुमन पंवार, रंजना वर्मा, मनीषा।
समाज सेवा : सराहनीय योगदान
सोनिया अरोड़ा, नाजिया, रीता गोयल, अर्चना जैन, गीता चंदोला, शाईस्ता इकबाल, सोनी निशा एवं डा. गरिमा सिंह।
ग्रामीण क्षेत्र : सराहनीय योगदान
मकतूला देवी, अनिता पंवार, रेखा देवी, मीनू क्षेत्री, रीता शर्मा।
जिन्होंने अपने खेल से रोशन किया देश-प्रदेश का नाम
हंसा मनराल शर्मा, चंद्रप्रभा एतवाल, सुमन कुटियाल, मोनिका बिष्ट, सविता गुरुंग, पूजा यादव, हिमांशी रावत, अनीता रावत, दिलराज कौर, कुहू गर्ग, शैलजा असवाल, दिव्यांशी जोशी, शैफाली गौतम, आरती सैनी।
तोड़ी बेड़ियां : साहसिक योगदान
लेफ्टिनेंट प्रिया सेमवाल, रेनू नेगी, मनीषा और शकुंतला।
शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय योगदान
माधुरी नेगी, डा. गौरी सेवक, सीमा डोरा, रीता सेमवाल, शमीमा खातून, सुनीता राणा, शमा प्रवीन।
उद्यमशीलता में सराहनीय योगदान
वंदना मोहन, रजनी, डा. गरिमा सिंह, राखी मलिक
जिन्होंने आंदोलन को मुकाम दिलाया
सरोज थपलियाल और बसंती मेहता।
समाजसेवा में उल्लेखनीय योगदान
रजिया बेग, जया ठाकुर, किरण हांडा, विनीता बिष्ट, परवीन कल्याणी, कुसुम जोशी, सोनिया अरोड़ा, आरती सैनी, शांति वर्मा, बीना अग्रवाल, माधुरी बर्थवाल।