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जमीन छुड़ाने बुलडोजर लेकर चढ़े अधिकारी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 22 Nov 2014 10:40 AM IST
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देहरादून में पैसिफिक हिल्स से जमीन छुड़ाने के लिए नगर निगम के एमएनए हरक सिंह रावत बुलडोजर लेकर पहुंच गए।
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लावलश्कर के साथ पहुंचे एमएनए निगम की जमीन पर बने अवैध फ्लैट तोड़ने पर उतारू थे। पैसिफिक हिल्स प्रोजेक्ट के वकीलों की गुजारिश की भी अनसुनी कर दी थी। लेकिन ऐन मौके पर जिला प्रशासन के दखल पर उन्हें अपने कदम खींचने पड़े।
निगम की जमीन पर दीवार बनाने का काम शुरू
एमएनए अवैध फ्लैट तो नहीं ढहा पाए, लेकिन निगम की जमीन पर दीवार बनाने का काम शुरू करा दिया। साथ ही ऐलान किया कि जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर बिल्डर्स को कदापि राहत नहीं दी जाएगी।
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शुक्रवार दोपहर एक बजे नगर निगम की टीम मुख्य नगर अधिकारी (एमएनए) हरक सिंह रावत के नेतृत्व में मसूरी डायवर्जन रोड स्थित पैसिफिक हिल्स हाउसिंग प्रोजेक्ट की साइट पर पहुंची। मौके पर एसओ राजपुर राजेश शाह भारी संख्या में पुलिस बल के साथ मौजूद थे।
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इस बीच बिल्डर्स को निगम की कार्रवाई की भनक लगी चुकी थी, इसलिए अपार्टमेंट के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया था और बाहर वकील कागजात लिए खड़े थे। एमएनए ने गेट का ताला खोलने के लिए कहा तो वकीलों ने उनकी तरफ कुछ दस्तावेज बढ़ा दिए।
लेकिन, एमएनए इस पर नहीं माने। गेट खुलवाकर जीसीबी और टीम के साथ अंदर दाखिल हो गए। इस दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, लेकिन एमएनए ने निगम की जमीन पर बने अपार्टमेंट के हिस्से को ढहाने का ऐलान कर दिया।
यह सुनते ही पैसिफिक हिल्स प्रबंधन में हड़कंप मच गया। सूचना जिला प्रशासन तक पहुंची तो आननफानन में सिटी मजिस्ट्रेट जीसी गुणवंत मौके पर आ गए। उन्होंने एमएनए को समझाया लेकिन रावत निर्माण ढहाने पर आमादा थे।
इसके बाद कंपनी से जुड़े लोग आग्रह की मुद्रा में आ गए। कहा कि अपार्टमेंट का यह हिस्सा ढहाया गया तो पूरी बिल्डिंग ही गिर जाएगी। उधर, कब्जे वाली जमीन तक पहुंचने के दोनों रास्तों पर निर्माण सामग्री गिरी हुई थी। जिस कारण जेसीबी मौके तक नहीं पहुंच पाई।
तकरीबन दो घंटे चले ड्रामे के बाद एमएनए ने दोबारा पैमाइश कर निगम की जमीन को अलग कर दीवार बनाने का आदेश दिया। इस पर बिल्डर्स ने भी हामी भर दी। इसके बाद एमएनए ने बिल्डर्स से कब्जे वाले जमीन पर रखी निर्माण सामग्री और मशीनें हटाने को कहा तो यह काम तुरंत करा दिया गया।
प्रशासन की रिपोर्ट एमएनए को नामंजूर
जिला प्रशासन के खिलाफ एमएनए की नाराजगी भी खुलकर सामने आई। बृहस्पतिवार को उन्होंने शहरी विकास सचिव को पत्र लिख प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए थे। शुक्रवार को मौके पर मौजूद पैसिफिक हिल्स प्रोजेक्ट के वकीलों ने एमएनए को बताया कि इस मामले में कोर्ट पैसिफिक हिल्स को क्लीन चिट दे चुका है।
इस पर एमएनए ने कहा कि क्लीन चिट का आधार जिला प्रशासन की रिपोर्ट थी, जो गलत है। नगर निगम की जांच में कब्जा साबित हो चुका है। इसकी पुष्टी जिला प्रशासन के अधिकारी भी कर रहे हैं।
दीवार का निर्माण युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। नगर निगम की जमीन पर निर्माण हुआ तो उसे ढहा दिया जाएगा। निगरानी के लिए मौके पर कर्मचारी तैनात किए जाएंगे।
- हरक सिंह रावत, मुख्य नगर अधिकारी
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
एक साल पूर्व हाईकोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने नगर निगम के साथ जमीन की पैमाइश की थी। प्रशासन ने जांच रिपोर्ट में पैसिफिक हिल्स को क्लीन चिट दी थी।
एक साल पूर्व जिस नक्शे से जिला प्रशासन ने पैमाइश की थी, उसी आधार पर 14 नवंबर को एमएनए ने जांच कराई तो निगम की जमीन पर कब्जा मिला। एमएनए ने बताया, इससे साबित होता है कि जिला प्रशासन ने कोर्ट को गलत रिपोर्ट दी थी।
क्यों आए सिटी मजिस्ट्रेट
अगर सिटी मजिस्ट्रेट मौके पर नहीं पहुंचते तो पूरी आशंका थी कि अवैध निर्माण पर नगर निगम की जेसीबी चल जाती। सिटी मजिस्ट्रेट के आते ही पैसिफिक हिल्स प्रोजेक्ट के प्रबंधन के हौसले बुलंद हो गए। सिटी मजिस्ट्रेट मौके पर क्यों पहुंचे, यह सवाल चर्चा का विषय बना रहा।
हाईकोर्ट में जाएगा निगम
नगर निगम जिला प्रशासन की ‘संदिग्ध रिपोर्ट’ के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। शुक्रवार को मेयर विनोद चमोली ने इस संबंध में एमएनए को आदेश जारी कर दिए। उधर, मेयर ने प्रमुख सचिव शहरी विकास को पत्र लिखकर मामले में प्रशासन की भूमिका की जांच की मांग उठाई है।
पूरा विवाद जिला प्रशासन ने खड़ा किया है। प्रशासन की भूमिका संदिग्ध न होती तो कोर्ट में रिपोर्ट गलत नहीं दी जाती। इसी रिपोर्ट के कारण नगर निगम की जमीन पर कब्जा किया गया है। मामले में हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।
- विनोद चमोली, मेयर
मुख्यनगर अधिकारी को दोबारा जांच रिपोर्ट रिसीव करा दी गई है। अगर वह माननीय उच्च न्यायालय जाते हैं तो अच्छी बात है। जो हकीकत थी उसकी रिपोर्ट दे दी गई है।
- मोहन सिंह बर्निया, एसडीएम सदर