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जमीन पर अटके दून के ‘हवाई’ रास्ते
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 04 Sep 2014 11:13 AM IST
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जाम और हादसे, लगातार बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच ये दो शब्द दून की सड़कों और चौराहों की पहचान बनते जा रहे हैं।
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सड़कों पर पैदल चलने वाले लोग अकसर हादसों का शिकार बनते हैं, वहीं सड़क पार करने के दौरान जाम का सबब भी बनते हैं।
ऐसे में महानगरों की तर्ज पर दून में भी पैदल चलने वालों को चार प्रमुख चौराहों पर हवाई रास्ते (फुटओवर ब्रिज) मुहैया कराने की महत्वाकांक्षी योजना मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने बनाई थी। लेकिन ये रास्ते जमीन पर ही ठिठक कर रह गए हैं।
शिलान्यास के करीब एक साल बाद भी तीन का काम शुरू नहीं हो पाया है, जबकि तहसील चौक पर निर्माणाधीन एफओबी का काम महीनों से ठप है। ऐसे में शहर को जाम से निजात मिलना मुश्किल नजर आ रहा है।
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कब क्या हुआ
अगस्त 2013: एफओबी के लिए निविदा आमंत्रित, हरियाणा की केबीबी कंपनी को मिला टेंडर
सितंबर 2013: एमडीडीए और कंपनी के बीच विभिन्न मसलों पर विमर्श
अक्तूबर 2013: कंपनी ने निर्माण के लिए सर्वे शुरू किया
27 जनवरी 2014: तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने गांधी इंटर कॉलेज में एफओबी का शिलान्यास किया
मार्च 2014: तहसील चौक पर एफओबी का काम शुरू हुआ
अप्रैल 2014: तहसील चौक पर खुदाई के बाद काम बंद
यह था दावा
शिलान्यास के वक्त दावा किया गया था कि तहसील चौक और एस्ले हाल के एफओबी का काम दिसंबर 2013 तक पूरा कर लिया जाएगा। जबकि घंटाघर चौक पर जनवरी 2014 और दर्शनलाल चौक पर एफओबी का निर्माण फरवरी 2014 तक पूरा कर लिए जाने का दावा।
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मेयर ने जताई थी आपत्ति
एफओबी के निर्माण के लिए एमडीडीए को लोक निर्माण विभाग, ऊर्जा निगम, नगर निगम आदि से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना था। बाकी विभागों से एनओसी मिल गई, लेकिन निगम से नहीं। हालांकि, तत्कालीन एमएनए ने एनओसी फाइल मंजूर कर ली थी, लेकिन मेयर विनोद चमोली ने इसे खारिज कर दिया।
विवाद इस बात पर है कि एमडीडीए ने निर्माणदायी कंपनी को एफओबी पर विज्ञापन पैनल लगाने की अनुमति दी है। नियमानुसार शहर में लगने वाले होर्डिंग का राजस्व निगम के खाते में जाता है। मेयर ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि एमडीडीए ने निगम से चर्चा किए बिना ही निर्माण शर्त में यह अनुमति देने की बात डाली है।
एफओबी और जुड़ने वाले क्षेत्र
तहसील चौक: सब्जी मंडी, तहसील, दून अस्पताल, डिस्पेंसरी रोड, एमकेपी कालेज और हेरिटेज स्कूल
घंटाघर चौक: परेड ग्राउंड, घंटाघर, चकराता रोड, राजपुर रोड, लैंसडौन चौक, इंदिरा मार्केट, एमडीडीए कांप्लेक्स, एमडीडीए पार्किंग
दर्शनलाल चौक: बुद्ध चौक, तहसील चौक, दून अस्पताल रोड, घंटाघर, लैंसडौन चौक, फालतू लाइन
एस्लेहाल चौक: कांग्रेस भवन, गांधी पार्क, सुभाष रोड, परेड ग्राउंड, लैंसडौन चौक
अब लगेगा एक साल
संबंधित कंपनी अब तक घंटाघर, दर्शनलाल और एस्ले हाल चौक पर काम शुरू नहीं कर सकी है। तहसील चौक पर भी काम बंद है। एमडीडीए सूत्रों की मानें तो अब किसी तरह कंपनी ने काम शुरू किया भी तो चारों एफओबी को पूरा होने में कम से कम एक साल का वक्त लगना तय है।
मिलनी हैं ये सुविधाएं भी
हर एफओबी में दोनों ओर दो-दो लिफ्ट लगाए जाने का प्रस्ताव है। हर लिफ्ट में 15 से 20 लोगों को ले जाने की क्षमता और इतना स्पेस होना अनिवार्य है कि विकलांग लोग व्हील चेयर समेत आसानी से आ-जा सकें।
इसके अलावा एफओबी पर डस्टबिन, पीने के पानी की व्यवस्था भी की जानी है। पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिहाज से बैरिकेडिंग और एफओबी की जानकारी के लिए साइन बोर्ड। 24 घंटे बिजली सप्लाई के लिए एफओबी पर सोलर पैनल लगाए जाने हैं। फायर फाइट सिस्टम भी अनिवार्य है।
एमडीडीए पर नहीं खर्चे का भार
चारों एफओबी के निर्माण के लिए प्रदेश सरकार या एमडीडीए को एक पाई खर्च नहीं करनी होगी। पीपीपी मोड पर होने वाले निर्माण के लिए संबंधित कंपनी के साथ तीस साल का एमओयू किया गया है।
निर्माण के अलावा मरम्मत का जिम्मा भी कंपनी पर रहेगा। कंपनी एफओबी के दोनों ओर और फुटपाथ, सीढ़ियों पर विज्ञापन पैनल लगा सकेगी। इसके जरिये मिलने वाली रकम से ही निर्माण लागत और मरम्मत का खर्चा कंपनी निकालेगी।
मामला विज्ञापन का था। यह नगर निगम का सब्जेक्ट है। बिना सहमति एमडीडीए नगर निगम के क्षेत्र में कैसे अतिक्रमण कर सकता है। इससे निगम को आर्थिक नुकसान होगा। इस मसले पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है। एमडीडीए और निगम अपने-अपने दायरे में रहें।
- विनोद चमोली, मेयर
फुटओवर ब्रिज बनाने वाले डेवलपर को लोन नहीं मिल पाया था। इसके चलते कुछ समय तक निर्माण कार्य रुका रहा। अब जल्दी काम शुरू हो जाएगा। जनता की सुविधा से जुड़ा फुटओवर ब्रिज का यह काम प्राधिकरण की प्राथमिकता में शामिल है।
- बंशीधर तिवारी, सचिव एमडीडीए