फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Our blood cholesterol path is ours, we are firefighters ...

रक्त रंजित पथ हमारा, हम पथिक हैं आग वाले...

Fri, 19 Jul 2019 01:48 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jul 2019 01:48 AM IST
विज्ञापन
Our blood cholesterol path is ours, we are firefighters ...
नगर निगम टाउन हाल में मनोहर लाल उनियाल श्रीमन् के जन्म शताब्दी पर आयोजित कार्यक्रम में का दीप प्र
‘रक्त रंजित पथ हमारा, हम पथिक हैं आग वाले, आग का हम राग गाते, पाप की दुनिया जलाते...’ जैसे गीतों और कविताओं से बृहस्पतिवार को नगर निगम का सभागार गूंज उठा। मौका था अंग्रेजों से स्वतंत्रता आंदोलन और टिहरी रियासत से आजादी की लड़ाई लड़ने वाले महान सेनानी व कवि मनोहर लाल उनियाल ‘श्रीमन’ के जन्म शताब्दी समारोह का। कार्यक्रम में प्रदेश के प्रमुख साहित्यकारों, कवियों, लोक कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने शिरकत कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
विज्ञापन

नगर निगम सभागार में बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मेयर सुनील उनियाल गामा ने टिहरी रियासत की आजादी में उनके योगदान को याद किया। उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार सोमवारी लाल उनियाल ‘प्रदीप’ ने कहा कि मनोहर लाल उनियाल ने राजशाही के जुल्मों को नजदीक से देखा, इसलिए उनकी कविताओं में उसके प्रति विद्रोह साफ झलकता है। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने कहा कि राजशाही और सामाजिक विद्रूपों से लड़ते हुए उन्होंने अपनी रचनाओं से काव्य संसार को नया आयाम दिया। गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने श्रीमन की कविता ‘भरकर नभ के खाली कोने, मैला तन पृथ्वी का धोने, उठ सागर के खारेपन को, सुमधुर कर जीवन में लाएं, पावस के बादल घिर आएं’ का पाठ कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
विज्ञापन

दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार गुरुदीप खुराना ने ‘दीप बुझ लिपट गया तम, मखमल सा रेशमी नरम’ कविता प्रस्तुत की। जनकवि डॉ. अतुल शर्मा ने ‘सूखेगी नदियां तो रोएंगी सदियां, ऐसा न हो प्यारा रह जाए पानी’, अंबर खरबंदा ने ‘जब मुझे सच्चाईयों का मर्म समझाते हैं लोग, क्या बताऊं किस कदर झूठे नजर आते हैं लोग’, कृष्णा खुराना ने ‘कैक्टस के पौधे सी कांटों भरी, टेढ़ी-मेढ़ी बदसूरत जिंदगी, सपनों के पंछी बैठे तो कैसे’, डॉ. असीम शुुक्ल ने ‘एक काम मर-मर कर जीना, और दूसरा जी-जी कर मरना’, डॉ. रामविनय सिंह ने ‘आज फिर इस बाग में असमय हुई बरसात, बोलो क्या करें हम’ और जिया नहटोरी ने ‘अश्क देकर मेरे होंठों की हंसी ले लीजिये, अपना गम दीजिये मेरी खुशी ले लीजिये’ रचना की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी। लोकेश नवानी और डॉ. अश्वघोष ने भी अपनी कविताएं सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इस अवसर पर मंजू काला, पूनम नैथानी, अवनीश उनियाल, साहित्यकार मुकेश नौटियाल, मुनिराम सकलानी, मधुसूदन सुंदरियाल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

श्रीदेव सुमन के साथ लड़ी जंग
मनोहर लाल उनियाल की पुत्री कल्पना बहुगुणा ने बताया कि उनके पिता ने श्रीदेव सुमन के साथ मिलकर टिहरी राजशाही के खिलाफ जंग लड़ी थी। इसके चलते उन्हें करीब 18 माह जेल में गुजारने पड़े। जेल की दीवारों पर कविताओं के जरिये वह अपने क्रांतिकारी विचार रखते। सैनिकों ने उन्हें ऐसा करने से रोका लेकिन वह नहीं माने। इस पर बेडियों में जकड़ दिया गया था। टिहरी के राजशाही से मुक्त होने के बाद उन्होंने स्वच्छंद होकर साहित्य सृजन का काम किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed