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उत्तराखंड में अफीम का अवैध कारोबार, पर चुप हैं ‘सरकार’

Wed, 29 Jun 2016 09:15 AM IST
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 29 Jun 2016 09:15 AM IST
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opium farming in uttarakhand
अफीम - फोटो : Getty Images

उत्तरकाशी के दूरस्थ सीमांत इलाके के 32,300 वर्ग मीटर क्षेत्र में अवैध तरीके से अफीम की खेती हो रही है। यह खुलासा केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की रिपोर्ट से हुआ है।

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करीब दो महीने पहले केंद्रीय एजेंसी ने अफीम की अवैध खेती की सेटेलाइट इमेज के साथ एक रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार को भेजी थी। साथ ही इस खेती को नष्ट करने के लिए प्रदेश पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चलाने की बात भी कही थी।
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पर अभी तक अफीम की अवैध खेती के खिलाफ कोई एक्शन नहीं होने से यह बात साबित हो गई है कि या तो इस रिपोर्ट को देखने के बाद सरकार भूल गई है या यह रिपोर्ट शासन की फाइलों के बीच दबकर रह गई है।
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यह स्थिति तब है जबकि सीएम पुलिस को नशे और नशे के कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का खुला आदेश दे चुके हैं। पिछले दिनों तो उन्होंने पुलिस से कहा कि नशे के कारोबारियों के बीच पुलिस का खौफ होना चाहिए। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होना समझ से परे है।

नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा सेटेलाइट इमेज से तैयार हुई रिपोर्ट

opium farming in uttarakhand
अफीम की खेती - फोटो : self

उत्तराखंड में उत्तरकाशी और चकराता क्षेत्र को नशे का बड़ा गढ़ माना जाता है, जहां से व्यापक स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी होती है। मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देशन में नशे के खिलाफ कई मुहिम चल चुकी हैं, लेकिन कोई नतीजे तक नहीं पहुंची।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक बार फिर 11 जुलाई से नशे के खिलाफ पुलिस का अभियान शुरू होगा। पर इन सबके बीच प्रदेश में नशे का कारोबार तेजी से फैल रहा है। उत्तरकाशी की रिपोर्ट तो आ गई, लेकिन चकराता की रिपोर्ट आनी बाकी है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा सेटेलाइट इमेज से तैयार रिपोर्ट में नक्शे के जरिए उत्तरकाशी के आसपास अफीम की खेती के इलाकों को दर्शाया गया है।

कोरबो में 3300 वर्ग मीटर, मसूरी में 2700 वर्ग मीटर, केतर में 2200 वर्ग मीटर, डासडा में 4400 वर्ग मीटर, नौ गांव में 2700, बडियानी में 5500, पही में 3300 और गोरसाली में 3300, कुमारकोट में 2200, पना में 2700 वर्ग मीटर इलाके में अफीम की खेती का अनुमान लगाया गया है। यह रिपोर्ट 29 अप्रैल को मुख्य सचिव को भेजी गई थी। रिपोर्ट में राज्य सरकार से संयुक्त टीम बनाकर अफीम की खेती नष्ट करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपेक्षा की गई थी।

4 डेसीमल से 40 हजार रुपय तक की फसल

opium farming in uttarakhand
मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह - फोटो : amar ujala

अफीम की खेती पनपने का मुख्य कारण है अफीम के पौधे से मोटी कमाई। बताया जाता है कि अफीम की खेती में महज चार डेसीमल जमीन में तीन हजार रुपये से 40 हजार रुपये की कमाई किसान को होती है। जबकि फुटकर में इसके रेट अफीम की क्वालिटी के हिसाब से कई गुना बढ़ जाते हैं। 

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की रिपोर्ट पर कार्रवाई के लिए गृह विभाग को लिखा गया है। टीम गठित कर क्या कार्रवाई हुई, इस बारे में अभी तक मुझे अवगत नहीं कराया गया है।
- शत्रुघ्न सिंह, मुख्य सचिव

Published By : Nirmala Suyal

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