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आठ हजार पुराने Phd धारक लड़ रहे हक की लड़ाई
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 01 Dec 2015 01:54 PM IST
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उत्तराखंड के पुराने पीएचडीधारक गेस्ट टीचर भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की जंग हार गए तो आने वाले समय में इनके लिए स्थायी भर्ती के रास्ते भी बंद हो सकते हैं। भविष्य में स्थायी भर्ती के समय सरकार गेस्ट टीचर भर्ती के मानकों को नजीर मान सकती है।
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उच्च शिक्षा निदेशालय हल्द्वानी में राजकीय डिग्री कालेजों के लिए गेस्ट टीचर की साक्षात्कार प्रक्रिया चल रही है। उच्च शिक्षा विभाग 25 हजार रुपये मासिक मानदेय पर एक सत्र के लिए गेस्ट टीचर्स की भर्ती कर रहा है। यूजीसी रेगुलेशन 2009 से पहले पीएचडी उपाधि में पंजीकृत अथवा पीएचडी कर चुके प्रदेश के करीब आठ हजार युवा गेस्ट टीचर भर्ती में शामिल होने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
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दरअसल अगर यूजीसी नियमों में कोई बदलाव नहीं करती तो भविष्य में जो भी स्थायी भर्ती होगी, राज्य उसमें गेस्ट टीचर की भर्ती के नियम लागू कर सकता है। तब सरकार के सामने पुराने पीएचडीधारकों को छूट देने में कई दिक्कत आ सकती हैं।
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अगर सरकार तब इन्हें छूट देती है तो यूजीसी रेगुलेशन 2009 के अनुसार पीएचडी करने वाला कोई अभ्यर्थी कोर्ट में चुनौती भी दे सकता है। तर्क मजबूत होगा कि जिन अभ्यर्थियों को अस्थायी भर्ती में ही अयोग्य ठहराया जा चुका है, उन्हें स्थायी भर्ती में कैसे शामिल किया जा सकता है।
बैक डेट से लागू किए गए एक नियम से आठ हजार युवा उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी बेरोजगारी की स्थिति में हैं। इनके भविष्य के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।
- डॉ. वीरेंद्र बर्त्वाल, मीडिया प्रभारी उत्तराखंड पीएचडी होल्डर एसोसिएशन