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सीएम साहब आएंगे, पेंशन लाएंगे

Tue, 19 Aug 2014 10:50 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 19 Aug 2014 10:50 AM IST
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old age woman waiting for pension

देहरादून के श्रीदेव सुमन नगर की पतली गली के कोने में पेड़ के नीचे बैठी दिगंबरी देवी की बूढ़ी आंखें बार-बार सामने रास्ते की ओर निहारती हैं।

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CM ने ही शुरु करवाई थी पेंशन
उन्हें इंतजार है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत फिर इस रास्ते से उनके दर पर आएंगे और पांच माह से रुकी हुई वृद्धावस्था पेंशन नसीब होगी।

सीएम ने ही शपथ ग्रहण के तुरंत बाद दिगंबरी से मुलाकात कर पेंशन शुरू करवाई थी। लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ एक बार पेंशन की रकम मिली है। दूसरी ओर, छह माह से किसी अधिकारी ने बुजुर्ग की सुध नहीं ली है।
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एक फरवरी 2014 को प्रदेश की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत अफसरों के अमले संग श्रीदेव सुमन नगर पहुंचे थे। दिगंबरी देवी का बड़ा बेटा ननकू बेरोजगार है, जबकि छोटा बेटा विक्रम मानसिक रूप से कमजोर।
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परिवार की आय का कोई जरिया नहीं है। सीएम हरीश रावत ने दिगंबरी देवी की हालत पर अफसोस जताते हुए फौरन गरीबों और मजबूरों को पेंशन दिलाने के अपने ड्रीम प्लान का ऐलान कर दिया था।

दिगंबरी देवी को आटा, दाल, चावल का इंतजाम करने के लिए तत्कालीन डीएम बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने उसी वक्त डेढ़ हजार रुपए भी दिए थे।

तब मुख्यमंत्री ने वादा किया था कि अब उसे कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन दिगंबरी बताती हैं कि उस दिन के बाद कोई अफसर उनकी खैरियत पूछने नहीं आया। पेंशन भी एक ही महीने की मिली है। अब किसी तरह काम चल रहा है।

दिगंबरी पास के एक खस्ताहाल कमरे को अपना घर बताती हैं, लेकिन इसके दरवाजे पर मेहताब खान का नाम लिखा है। पेंशन पट्टे से संबंधित कोई कागजात भी दिगंबरी के पास नहीं हैं।


पड़ोस की एक महिला ने बताया कि कागजात क्षेत्रीय पार्षद के पास हैं।

पट्टा मिला, पेंशन नहीं
राजेंद्रनगर की बकरीदन भी पेंशन पट्टा लिए भटक रही हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश पर चले विशेष अभियान में उन्हें पेंशन पट्टा मिला था, लेकिन अब तक पेंशन नहीं मिली।

वह तहसील के चक्कर लगाया करती हैं। करीब छह माह पूर्व वृद्धावस्था, विकलांग और विधवा पेंशन के 5809 पट्टे दिए गए थे। लेकिन इनमें से अधिकतर को सिर्फ एक माह की पेंशन मिली है।

दिगंबरी देवी की तीन महीने की पेंशन पास हो गई है। उनके बैंक खाते में रकम भेज दी गई है। बाकी स्थिति उनके कागजात देखने के बाद ही बताई जा सकेगी।
- राम अवतार सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी

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