यहां भारत की सीमाओं की असुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं अफसर, जानिए कैसे?
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भारत की सीमाओं की असुरक्षा के लिए अफसर जिम्मेदार हैं। इनकी लापरवाही की वजह से देश की सीमाएं असुरक्षित होती जा रही हैं।
सीमाओं की सुरक्षा और इससे सटे सैकड़ों गांवों से पलायन रोकने को संचालित सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) जैसी योजनाएं पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पा रही हैं।
योजना को शत प्रतिशत धरातल पर नहीं उतारे जाने से जहां सीमांत गांवों से पलायन नहीं रुक रहा है और गांव दर गांव खाली हो रहे हैं वहीं गांवों के खाली होने से देश की सीमाएं भी असुरक्षित हो रही है। हालत यह है कि केंद्र की ओर से बीएडीपी के तहत पिछले साल जारी बजट को ही अफसर खर्च नहीं पाए हैं।
ऐसे में केंद्र सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में स्वीकृत बजट को जारी करने में करीब-करीब रोक ही लगा दी है। बीएडीपी राज्य के पांच जिलों चमोली, उत्तरकाशी, चंपावत, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर जैसे जिलों में लागू है।
ग्रामीणों का पलायन रुकने से देश की सीमाएं सुरक्षित रहेगी
योजना का उद्देश्य राज्य के सीमांत इलाकों में बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास गांवों से पलायन रोकना है। गांवों में ग्रामीणों का पलायन रुकने से देश की सीमाएं भी सुरक्षित रहेगी। लेकिन, कार्यक्रम को लागू कराने और पलायन रोकने में अफसर नाकाम साबित हो रहे हैं।
ग्राम्य विकास विभाग के ही आंकड़ों पर नजर डाले तो योजना के तहत पिछले साल जारी बजट 32.76 करोड़ में से आधी रकम भी ग्राम्य विकास विभाग के अफसर खर्च कर पाए हैं। छह माह बीत जाने के बावजूद इस बजट में से महज 12.64 करोड़ खर्च हो पाया है।
केंद्र सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में भी 35.45 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है। लेकिन, पिछले साल का बजट खर्च नहीं कर पाने के कारण केंद्र ने इस साल बजट को जारी करने में अघोषित रोक लगा दी है। अपर सचिव युगल किशोर पंत का कहना है कि योजना की लगातार समीक्षा की जा रही है।
योजना के तहत जारी बजट का पूरा इस्तेमाल कर सीमांत इलाकों में विकास कार्यों को तेजी से कराया जाए, इसके लिए जिला स्तरीय अधिकारियों को आदेश जारी किए गए हैं।