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अफसर वीआईपी ड्यूटी बजाएं या जमीनों के झगड़े निपटाएं
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 22 Jun 2017 12:51 PM IST
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- फोटो : file photo
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पर्यटन प्रदेश उत्तराखंड में प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक बड़ा काम वीआईपी ड्यूटी का भी है। गर्मियों के तीन महीने देश भर से वीआईपी उत्तराखंड आते हैं और उनके आतिथ्य का सारा दारोमदार संबंधित जनपद के जिलाधिकारी, एडीएम, एसडीएम और तहसीलदार स्तर के अधिकारियों पर होता है।
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महानुभावों की आवभगत में वे इतने उलझे हैं कि राजस्व अदालतों में जमीनों से संबंधित वादों(केस) का पहाड़ बढ़ता ही जा रहा है। अप्रैल तक राजस्व अदालतों में लंबित वादों की संख्या 41,143 पहुंच चुकी थी। जिस दर से केस निपट रहे हैं, उससे दोगुनी और तीन गुनी दर से वाद दर्ज हो रहे हैं।
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निपटारे में तेजी आ सकती थी, मगर डीएम, एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदारों को दूसरी प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन से फुरसत नहीं मिल रही। बाकी कसर सैरसपाटे के लिये उत्तराखंड आने वाले अतिथियों की ड्यूटी ने पूरी कर दी है। अदालतों में बैठना नियमित नहीं हो पा रहा, लिहाजा केस बढ़ते जा रहे हैं।
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जाहिर तौर पर जिन जनपदों में जमीन सोने के भाव है, वहां भूमि विवादों की संख्या भी ज्यादा है। पर्वतीय जनपदों की तुलना में मैदानी जनपदों में सबसे अधिक वाद लंबित हैं। देहरादून में 8267, ऊधमसिंहनगर में 6472, नैनीताल में 5081 और हरिद्वार में सर्वाधिक 11452 वाद लंबित हैं। खुद राजस्व परिषद के अध्यक्ष, जो मुख्य सचिव होते हैं, की कोर्ट में ही अप्रैल महीने तक 308 केस लंबित थे। वादों के निस्तारण में हो रही देरी से फरियादियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। केस पर तारीख पर तारीख से वे खिन्न हैं।
ये बात सही है कि राजस्व अदालतों में ज्यादा केस पेंडिंग हैं। लेकिन डीएम, एसडीएम, तहसीलदार विविध प्रशासनिक प्रायोजनों से भी बंधे हैं। सिर्फ वीआईपी ड्यूटी ही नहीं उन्हें निर्वाचन, गणनाएं, योजना और आपदा सरीखे तात्कालिक महत्व की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। कतिपय अवसरों पर वकीलों की हड़ताल भी वजह बन जाती हैं। मगर इन सबके बावजूद जिन अफसरों में कमिटमेंट होता है, वे कोर्ट लगाते हैं और लंबित प्रकरणों के निपटारा करते हैं। वाद निस्तारण में तेजी के लिए समय-समय पर कमिश्नर और जिलाधिकारी को निर्देश जारी किए गए हैं।
- एसएन पांडेय, आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद
जनपदों में लंबित वाद
देहरादून- 8267
हरिद्वार- 11452
ऊधमसिंहनगर- 6472
नैनीताल- 5081
उत्तरकाशी- 1392
चमोली- 286
टिहरी- 1121
पौड़ी- 1824
रुद्रप्रयाग- 142
अल्मोड़ा- 790
पिथौरागढ़- 516
बागेश्वर- 304
चंपावत- 308
राजस्व परिषद में-1198
गढ़वाल आयुक्त/ अपर आयुक्त- 1373
कुमाऊं आयुक्त/ अपर आयुक्त- 617