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हर नियम को धुएं में उड़ाता चला गया!

Fri, 04 Mar 2016 01:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 04 Mar 2016 01:51 AM IST
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no rules follow in cigarettes sale.

‘फिक्र को धुएं में उड़ता चला गया’ कुछ इसी अंदाज में आज के युवा से लेकर बुजुर्ग तक नियम और कानून को धुएं में उड़ा रहे हैं। तभी तो एक जनवरी 2016 को केंद्र सरकार की ओर से सिगरेट की खुदरा बिक्री पर लगाई गई रोक के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

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पहले से भी तंबाकू और धूम्रपान को हतोत्साहित करने के लिए तमाम नियम और कायदे बने पर इनका रत्ती भर भी पालन नहीं हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के स्तर से बार-बार निर्देश मिलने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
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लोगों में तंबाकू की लत खत्म करने के लिए जनवरी 2014 में प्रदेश में गुटके की बिक्री पर रोक लगाई गई। लेकिन, सार्वजनिक क्षेत्र में धूम्रपान, खुली सिगरेट की बिक्री, स्कूलों के पास तंबाकू उत्पादों की बिक्री और 21 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को तंबाकू उत्पादन बेचना प्रतिबंधित होने के बावजूद प्रदेश में धडल्ले से जारी है। अब नए निर्देश जारी होने के करीब एक माह बाद भी सरकार की ओर से इसके क्रियान्वयन के लिए कोई भी प्रयास नहीं किए गए।
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चारों ओर धुआं ही धुआं
लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने से रोकने के लिए जुर्माने का प्रावधान है। इसके तहत सभी सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान को पूरी तरह प्रतिबंधित करते हुए 200 रुपये जुर्माने की व्यवस्था की गई। 14 जनवरी 2015 को केंद्र सरकार ने जुर्माना राशि बढ़ाकर एक हजार रुपये करने की सिफारिश की। हालांकि प्रदेश में इस कानून के तहत पिछले तीन वर्षों में 30 मामले भी दर्ज नहीं हो पाए हैं।

अब भी जारी है खुदरा सिगरेट की बिक्री

no rules follow in cigarettes sale.

उत्तराखंड सरकार ने चार दिसंबर 2014 को केंद्र सरकार से भी पहले खुदरा सिगरेट की बिक्री पर रोक लगाई थी लेकिन राज्य आत तक यह व्यवस्था प्रभावी नहीं हो पाई है। पिछले माह केंद्र सरकार ने इस संबंध में दोबारा निर्देश जारी कर बिक्री को प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए थे।

कोई उम्र की सीमा नहीं
केंद्र सरकार ने अपनी सिफारिशों में तंबाकू उत्पाद खरीदने वाले व्यक्ति की न्यूनतम आयु 18 साल से बढ़ाकर 21 भले ही कर दी हो लेकिन इसका पालन होता नहीं दिखता। खोमचों, ठेलियों और दुकानों से नाबालिग भी खुलेआम तंबाकू उत्पाद खरीदते हैं।

स्कूलों के पास भी बिक्री जारी
केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों के बावजूद स्कूलों के पास भी तंबाकू उत्पादों की बिक्री धडल्ले से जारी है। वहां नाबालिगों को भी तंबाकू उत्पाद आसानी से उपलब्ध है। जिसके चलते सरकार की बच्चों और नाबालिगों को तंबाकू से दूर रखने की योजना को पलीता लग रहा है।

तंबाकू खाने में सबसे आगे
कुछ समय पहले ग्लोबल एडल्ट टोबैको के सर्वे के मुताबिक उत्तर भारत के नौ राज्यों में उत्तराखंड तंबाकू उपयोग में सबसे आगे हैं। उत्तराखंड में तंबाकू का सेवन करने वालों की संख्या 30.07 फीसदी तक है जबकि जम्मू कश्मीर में 26.6 फीसदी लोग तंबाकू खाते हैं। प्रदेश के 11 फीसदी लोग सिगरेट और 19.2 फीसदी लोग बीड़ी पीते हैं।

तंबाकू पर रोक लगाने के लिए समय-समय पर विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए जाते हैं। प्रभावी रोक के लिए अन्य विभागों और आम जनता को भी सहयोग करना होगा। समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
-डॉ. कुसुम नरियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक

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