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जलजले के पूर्वानुमान से अनजान है आधुनिक विज्ञान

Mon, 27 Apr 2015 11:00 AM IST
अंकित कुमार गर्ग/ अमर उजाला, रुड़की
अंकित कुमार गर्ग/ अमर उजाला, रुड़की Updated Mon, 27 Apr 2015 11:00 AM IST
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no pre alert of earthquake.

भूकंप का रहस्य पृथ्वी के गर्भ में छिपा है। यह रहस्य इसलिए हैं क्योंकि वैज्ञानिक इस घटना के कारणों तक पहुंच गए हैं और इसके सटीक पूर्वानुमान से पूरी तरह अनभिज्ञ है।

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वैज्ञानिकों के अनुसार शुरुआती दौर में धरती में पड़ी दरारों से होकर इसके भीतर से निकला तापीय पदार्थ ऊपर आकर जमता गया और धरती को विपरीत दिशाओं में धकेलने लगा। इस तरह प्लेटों में बंटी धरती लगातार रगड़ खाकर भूकंप को जन्म दे रही है।
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आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक प्रो. एमएल शर्मा ने भूकंप की घटना के लिए जिम्मेदार प्लेटों के बनने के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि लाखों साल पूर्व पूरी पृथ्वी गर्म थी। जब पृथ्वी ठंडी होनी शुरू हुई तो पहले इसकी ऊपरी सतह ठंडी हुई, जबकि भीतर की तह अपेक्षाकृत गरम थी ऊपरी परत ठंडी होने के कारण धरती कई जगहों पर सिकुड़ने लगी।
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धरती के सिकुड़ने के कारण ही इसमें दरारें पड़ने लगी। इन दरारों में जैसे-जैसे पृथ्वी के भीतर मौजूद तापीय पदार्थ ऊपर की ओर आया तो सतह पर आकर ऊपर उठता गया और जमने लगा। इसके बाद फिर जो भी तापीय पदार्थ बाहर की ओर आया उसने पहले जमे हिस्से को विपरीत दिशाओं में खिसकाना शुरू कर दिया।

इसी प्रक्रिया के तहत हिमालय में धरती इंडियन और यूरेशियन प्लेट में बंट गई। अब इन्हीं प्लेटों की आपसी टक्कर भूकंप ला रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र के अलावा भी धरती के विभिन्न हिस्सों में तेजी से परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि हाल ही में अफ्रीका के चिली क्षेत्र में पृथ्वी के भीतर से निकला गर्म लावा ऊपरी सतह से 20 किमी तक उछला। जो इस बात का प्रमाण है कि पृथ्वी के भीतर तेजी के साथ ऊर्जा इकट्ठी हो रही है।

70 से ज्यादा गिरासू भवन हैं दून में

no pre alert of earthquake.

भूकंप का एक बड़ा झटका दून में कई भवनों को जमींदोज कर सकता है। शहर में इस समय 70 से ज्यादा ऐसी इमारतें है, जिन्हें प्रशासन ने गिरासू भवनों की श्रेणी में रखा है। इन इमारतों में हजारों की संख्या में लोग रहते हैं।

बावजूद इसके, प्रशासन ऐसी इमारतों का कोई ठोस हल नहीं निकाल रहा। नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद अब ऐसे घरों में रहने वाले परिवारों को जानमाल की चिंता सता रही है। शहर का मध्य इलाका (रेट्रो एरिया) में सबसे ज्यादा गिरासू भवन हैं।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थित ये भवन अगर गिरे तो आसपास के भवनों को भी जबरदस्त नुकसान होगा। अधिकतर भवन सौ साल पहले बने हैं। इनकी मरम्मत न होने के कारण भूकंप का महज पांच रियेक्टर का झटका ही इन्हें गिराने के लिए काफी है।

कुछ साल पूर्व बिंदालपुल के पास एलआईसी बिल्डिंग ऐसे ही दिन भरभरा कर गिर गई थी। गिरासू भवनों का सर्वेक्षण नगर निगम, लोनिवि, एमडीडीए और जिला प्रशासन करता है। मेयर विनोद चमोली ने बताया, कि अधिकतर भवन तो ऐसे हैं, जिन पर किरायेदार और मालिक कोर्ट में आपस में लड़ रहे हैं। ऐसे भवनों को खाली कराने में दिक्कत आती है।

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