बदल गया माउंट एवरेस्ट का रास्ता, ये होगा नया रूट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एवरेस्ट की ओर रुख करने वाले पर्वतारोहियों को अब कुंभु ग्लेश्यिर के खतरे का सामना कम करना होगा। इतना जरूर है कि रास्ता थोड़ा लंबा होगा और पर्वतारोहियों को सीधी बर्फ की दीवार का सामना कई जगह करना पड़ेगा।
विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की ओर रुख करते समय पर्वतारोहियों को 5360 मीटर क्री ऊंचाई पर बेस कैंप से आगे कुंभु ग्लेश्यिर के बांयी ओर से होते हुए आगे बढ़ना होता है।
5970 मीटर की ऊंचाई पर बेस कैंप वन तक पहुंचने के लिए इस ग्लेश्यिर को पार करना सबसे जोखिम भरा काम है। कारण यह भी है कुंभु आइस फॉल का यह रास्ता लगातार ग्लेश्यिर की हलचल का है। यहां सबसे अधिक हिमस्खलन होता है। ऐसे में इस रास्ते को पर्वतारोही रात के समय में पार करते हैं।
तीन आइस वॉल का सामना करना होगा
निम के प्रधानाचार्य और दो बार एवरेस्ट फतह कर चुके कर्नल अजय कोठियाल के मुताबिक सागर माथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस रूट पर आवाजाही नियंत्रित करता है। अब नेपाल सरकार ने इस रास्ते पर आवाजाही रोक दी है। अब बांयी तरफ की बजाय सीधे ही बेस कैंप से आगे बढ़ना होगा।
कर्नल कोठियाल के मुताबिक इसके कई फायदे हैं। रास्ते की लंबाई जरूर बढ़ जाएगी पर इस रास्ते पर जोखिम कम है। करीब तीन आइस वॉल का सामना जरूर पर्वतारोहियों को करना होगा।
2007 और 2014 में एवरेस्ट सम्मिट कर चुके सुबेदार मेजर तेजपाल के मुताबिक इस नए रास्ते का एक फायदा और है। अधिक ऊंचाई पर शरीर को अभ्यस्त करने के लिए पर्वतारोहियों को बेस कैंप से लेकर कैंप वन, कैंप टू और कैंप थ्री के बीच में तीन बार चक्कर लगाना पड़ता था। अब यह काम आइलैंड पीक पर पहुंचकर आसानी से किया जा सकेगा।