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आखिर क्यों? भारत आकर विदेशी बच्चों के बनना पड़ा 'मजदूर'

Thu, 16 Jul 2015 04:22 PM IST
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, हरिद्वार
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, हरिद्वार Updated Thu, 16 Jul 2015 04:22 PM IST
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Netherland students work in indian primary school.

नीदरलैंड से भारत आए संपन्न घरों के बच्चे भारत आकर मजदूर बनना पड़ा। आखिर क्या है पूरा मामला? जानने के लिए पढ़ें...

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हरिद्वार के जमालपुर गांव के सरकारी स्कूल में विदेशी बच्चों ने तीन दिन कुर्सी-मेज बनाए। गोरे बच्चों और उनके साथ आए शिक्षकों ने स्कूल में एक चबूतरा बनाया और आसपास पौधे रोपे।

तीन दिन तक यह विदेशी बच्चे पूरे गांववालों के लिए कौतुहल का विषय बने रहे। इस दौरान गांववालों की समझ भी नहीं आया कि सात समंदर पार से आए इन बच्चों को मजदूरी करने की जरूरत क्यों पड़ी।
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आखिर में पता चला कि नीदरलैंड के यह स्कूली बच्चे और शिक्षक एक प्रोजेक्ट के तहत स्वालंबन की शिक्षा ले रहे हैं तो सभी ने वहां की शिक्षा प्रणाली को जमकर सराहा।
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नीदरलैंड से 24 सदस्यीय यह दल रविवार को जमालपुर गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय पहुंचा। इस दल में चार शिक्षक, एक डाक्टर और बाकी कक्षा नौ से 12 तक पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं शामिल हैं। मंगलवार तक इस दल ने सुबह नौ से शाम पांच बजे तक स्कूल में खूब पसीना बहाया।

बुधवार को यह दल ऋषिकेश-देहरादून के लिए रवाना हो गया। तीन दिन तक नीदरलैंड के इन बच्चों ने स्कूल के बच्चों के लिए 24 जोड़ी कुर्सी-मेज बनाई। इसके लिए यह विदेशी बच्चे ज्वालापुर बाजार से लकड़ी और फर्नीचर बनाने के उपकरण खुद खरीदकर लेकर पहुंचे। इन बच्चों ने स्कूल परिसर में ईंटों से एक चबूतरा बनाया।

रोज आठ घंटे की कड़ी मेहनत

Netherland students work in indian primary school.

परिसर और आसपास 50 पौधे भी रोपे। प्रतिदिन आठ घंटे इन बच्चों की मेहनत देखकर हर कोई हतप्रभ है। समय की प्रतिबद्धता ऐसी रही कि सुबह नौ बजने से पांच मिनट पहले सभी बच्चे स्कूल पहुंच जाते थे।

दल में शामिल डिसेंट, चैना, रोबिन, डेजर्फी, एन्डरीड, ऐरिक और निमा आदि छात्रों ने बताया कि उनके स्कूली पाठ्यक्रम में स्वालंबन शिक्षा का प्रोजेक्ट शामिल है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में जो पैसा खर्च होता है उसे बच्चे अपनी जेब खर्च में कटौती कर इकट्ठा करते हैं।

पानी के टैंक की भी की व्यवस्था
राजकीय प्राथमिक विद्यालय जमालपुर के प्रधानाध्यापक अजय शर्मा ने बताया कि नीदरलैंड के छात्रों की ओर से स्कूल की छत पर रखने के लिए पानी का एक टैंक भी खरीदा है।

यह दल ऋषिकेश-दून से वापस लौटने के बाद इस टैंक को चालू करेगा। उन्होंने बताया नीदरलैंड से छात्रों का यह दल दो भारतीय संस्थाओं (एक्टिव इंडिया होलीडे और परिचय इंडिया) के माध्यम से उनके स्कूल पहुंचे।

सीख दे गए विदेशी
राजकीय प्राथमिक विद्यालय जमालपुर में 283 बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों ने तीन दिनों में विदेशी छात्रों से काफी कुछ सीखा। बच्चों ने जाना कि अपना काम स्वयं करना चाहिए और मिट्टी-लकड़ी का काम करने के बावजूद स्वयं को साफ-सुथरा भी रखना चाहिए।

दुभाषिये की मदद से जमालपुर के बच्चों ने विदेशी छात्रों से वहां के रहन-सहन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ सवाल पूछे। नीदरलैंड के छात्रों ने भी जमालपुर के बच्चों से उनकी शिक्षा को लेकर सवाल किए।

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