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दवा और दुआ कुछ नहीं आई शक्तिमान के काम

Thu, 21 Apr 2016 04:00 AM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 21 Apr 2016 04:00 AM IST
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neither drugs nor pray did work for shaktimaan.
शक्तिमान का इलाज करते डॉक्टर। - फोटो : file photo

दवा और दुआ भी पुलिस के घोड़े शक्तिमान के काम नहीं आ सकी। दिन-रात सेवा में जुटे रहे जवानों के साथ पशु प्रेमियों की एक ही इच्छा थी कि कैसे भी हो शक्तिमान को जिंदा रखा जाए। मिनी आपरेशन पहले वो बिलकुल नार्मल था, किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि शक्तिमान इस तरह उन्हें छोड़कर निकल जाएगा। दूसरी टांग के जख्म भरने का आपरेशन शक्तिमान की जिंदगी का अंतिम आपरेशन साबित हुआ।

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घायल होने के बाद से ही शक्तिमान पर राजनीतिज्ञों, पुलिस, पशु प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ता नजर गड़ाए थे। राजनीतिज्ञों की नजर में वो जरूर मुद्दा हो सकता है, लेकिन आम जनमानस के प्रेम ने नई गाथा को लिखा है। घोड़े के उपचार के लिए न केवल दुआएं की, अपितु उसके इलाज में जी खोलकर मदद करने में कोई कंजूसी नहीं बरती।
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मिसाल रहेगा शक्तिमान के लिए यह प्रेम
उपचार के 36 दिनों में लोग खुद आकर शक्तिमान के दवाएं और संसाधन उपलब्ध कराते रहे, जिससे उपचार में काफी मदद मिली है। अमेरिका की डाक्टर जेनी मेरी वॉन और मुंबई के डॉ फिरोज कंबोटा के अलावा वेटरनी चिकित्सकाें की टीम भी अपने कामकाज छोड़कर शक्तिमान के उपचार में लगे रहे।
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एसएसपी सदानंद दाते और एसपी ट्रैफिक धीरेन्द्र गुंज्याल के अलावा एसडीआरएफ, प्रशिक्षु सिपाही और पुलिस लाइन का अमला सुबह शाम शक्तिमान के बीच खड़ा रहा। शक्तिमान से लगाव होने के कारण पुलिस लाइन में तैनात कर्मचारी अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद अधिकांश समय शक्तिमान की सेवा में बचाते थे। शहर के अलावा दूर-दराज के पशु प्रेमी भी दुआएं करते रहे।

बुधवार पुलिस लाइन में जिले भर के वेटरनिटी चिकित्सक जुटे थे। सोचा था कि मिनी ऑपरेशन शक्तिमान के दर्द को कम करने का काम करेगा, लेकिन परिणाम ने चिकित्सकों के होश उड़ा दिए। शायद अनहोनी को यह मंजूर था, लेकिन शक्तिमान के प्रति इंसानी प्रेम सदियों तक एक मिसाल रहेगा।  

पुलिस लाइन में बनेगा शक्तिमान द्वार
शक्तिमान की स्मृति में पुलिस लाइन के एक गेट का नाम शक्तिमान द्वार हो सकता है। शक्तिमान की मौत से आहत एसएसपी सदानंद दाते ने बताया कि शक्तिमान के नाम पर पुलिस लाइन के एक गेट को शक्तिमान द्वार बनाया जा सकता है। 


विधिक राय लेकर करेंगे कार्रवाई
शक्तिमान की मौत के बाद दर्ज मुकदमे में किस तरह की धारा बढे़गी या नहीं, इसके लिए विधिक राय लेकर कोई फैसला किया जाएगा। वैसे तो पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा में यह सब सम्माहित है। पुलिस स्तर से शक्तिमान के उपचार में कोई कोताही नहीं बरती गई है। इस मामले की विवेचना अंतिम चरण में है। जल्द ही आरोप पत्र दाखिल कर दिया जाएगा। 
-डॉ सदानंद दाते, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक।

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