नवरात्रि 2018: 10 अक्टूबर से शुरू होंगी नवरात्रि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त पढ़ें यहां...
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इस बार शारदीय नवरात्रि का शुभारम्भ 10 अक्टूबर से हो रहा है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।
पंडित विपिन चंद्र जोशी ने बताया कि नवरात्रि पर मन चाहा आशीर्वाद पाने के लिए भक्तों को दिन के अनुसान मां के रूप का पूजन करना चाहिए।
10 अक्टूबर, प्रतिपदा - बैठकी या नवरात्रि का पहला दिन- घट/ कलश स्थापना - शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी पूजा
11 अक्टूबर, द्वितीया - नवरात्रि 2 दिन तृतीय- चंद्रघंटा पूजा
12 अक्टूबर, तृतीया - नवरात्रि का तीसरा दिन- कुष्मांडा पूजा
13 अक्टूबर, चतुर्थी - नवरात्रि का चौथा दिन- स्कंदमाता पूजा
14 अक्टूबर, पंचमी - नवरात्रि का 5वां दिन- सरस्वती पूजा
15 अक्टूबर, षष्ठी - नवरात्रि का छठा दिन- कात्यायनी पूजा
16 अक्टूबर, सप्तमी - नवरात्रि का सातवां दिन- कालरात्रि, सरस्वती पूजा
17 अक्टूबर, अष्टमी - नवरात्रि का आठवां दिन-महागौरी, दुर्गा अष्टमी ,नवमी पूजन
18 अक्टूबर, नवमी - नवरात्रि का नौवां दिन- नवमी हवन, नवरात्रि पारण
19 अक्टूबर, दशमी - दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी
ऐसे करें कलश स्थापना
अगर आप घर में कलश स्थापना करना चाहते हैं तो सबसे पहले उस जगह हो पवित्र कर लें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। अब एक कलश पर स्वस्तिक बनाएं।
फिर कलश पर कलावा बांधे और उसमें जल भरें। कलश में साबुत सुपारी, फूल, इत्र, पंचरत्न, अक्षत और सिक्का डालें।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
भक्त 10 अक्टूबर को सुबह 7:25 बजे तक नवरात्रि का कलश स्थापित कर सकते हैं। कलश स्थापना के लिए यह शुभ मुहूर्त है। यदि आप किसी वजह से इस समय कलश स्थापित नहीं कर पाते हैं तो इसी दिन सुबह 11:36 बजे से लेकर दोपहर 12:24 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भी कलश की स्थापना कर सकते हैं।
नवरात्रि की अखंड जोत
पंडित रामभूषण के अनुसार जिन घरों में नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योत जलाई जाती है, उनमें मां की विशेष कृपा होती है लेकिन इसके लिए नियमों का पूरा पालन करना होता है।
अखंड दीप जलाने वाले व्यक्ति को जमीन पर ही सोना चाहिए। ज्योत को बुझने नहीं देना चाहिए। इस दौरान घर में सफाई रखनी चाहिए।
पूजा के वक्त किसी के बारे में मन में बुरे विचार नहीं लाने चाहिए और सच्चे मन से मां का ध्यान करना चाहिए।