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टिहरी दुष्कर्म मामला: डॉक्टर और पुलिस की लापरवाही से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग नाराज
Thu, 06 Jun 2019 09:07 AM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 06 Jun 2019 09:07 AM IST
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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नैनबाग दुष्कर्म मामले में चिकित्सक और पुलिस की भूमिका से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग बेहद नाराज है। अपने स्तर पर जांच कर रही आयोग की सदस्य डॉ. स्वराज विद्वान बुधवार को दून अस्पताल पहुंचीं और उन्होंने पीड़ित बच्ची के बयान लिए। इस मौके पर झबरेड़ा के विधायक देशराज कर्णवाल व अस्पताल प्रशासन व पुलिस के अधिकारी भी मौजूद थे।
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घटना को बेहद घृणित और अमानवीय बताते हुए उन्होंने साफ किया कि जांच में जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। वे अपने स्तर पर जांच कर रही हैं और प्रशासन के स्तर पर जो जांच रिपोर्ट आयोग को दी जाएगी, उसका वे आयोग के स्तर पर लिए जा रहे बयानों के आधार पर परीक्षण करेंगे और उसके आधार पर कार्रवाई होगी। स्वराज ने बताया कि उन्होंने आठ जून को पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में इस प्रकरण के संबंध में सभी पहलुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में आयोग अपने स्तर पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगा।
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उसकी पीड़ा सुनकर मुझे रोना आ गया
आयोग की सदस्य डॉ. स्वराज विद्वान ने कहा कि जब वे दून अस्पताल में बच्ची से मिली तो उसकी पीड़ा सुनकर मुझे रोना आ गया। उसकी हालत में कुछ सुधार है। लेकिन उसके जेहन में दहशत अब भी कायम है। मैं जब उसके पास गई तो वो मुझसे लिपट गई। मैंने सभी को बाहर भेजा और उसके बयान लिए। मुझे उसने जो भी बताया है, वो शायद ही किसी ओर को बताया होगा।
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मैं पुलिस और अस्पताल के रवैये की संवेदनहीनता से भी व्यथित हूं। मुझे जब यह बताया गया कि उसे अस्पताल से अगले ही दिन डिस्चार्ज कर दिया गया था और जब हालत बिगड़ी तो फिर अस्पताल में भर्ती किया गया। आखिर ऐसी क्या आफत आ रखी थी कि बच्ची का पूरा उपचार करने के बजाय उसे घर भेजने की जल्दी की गई। इस पूरे मामले में मैंने शासन से रिपोर्ट मांगी है।
ऐसी पीड़ितों के लिए हो प्राइवेट रूम
अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य स्वराज विद्वान ने दून अस्पताल में जब बच्ची को सामान्य वार्ड में भर्ती देखा तो भारी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए कि ऐसी पीड़ित बच्चियों के लिए प्राइवेट रूम की व्यवस्था हो। उन्होंने बच्ची को प्राइवेट रूम में शिफ्ट करने के भी निर्देश दिए।
अस्पताल में नहीं प्राइवेट वार्ड तो कैसे करें शिफ्ट
दून महिला अस्पताल में प्राइवेट वार्ड न होने के कारण दुष्कर्म पीड़ित बच्ची को जनरल वार्ड में ही रखा जाएगा। बुधवार को अस्पताल पहुंचीं एससी-एसटी आयोग की सदस्य स्वराज विद्वान ने बच्ची को प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट करने के निर्देश दिए, लेकिन अस्पताल के एमएस ने इस पर असमर्थता जताई है। अधिकारियों के मुताबिक जहां बच्ची को भर्ती किया गया है, वहां कोई मरीज भर्ती नहीं है। पर्दे और कूलर लगाकर इसी वार्ड को प्राइवेट वार्ड की तरह बना दिया गया है।
बीते चार दिनों से नैनबाग क्षेत्र की दुष्कर्म पीड़ित बच्ची दून महिला अस्पताल में भर्ती है। उससे मिलने हर रोज कोई न कोई पहुंच रहा है। इसी क्रम में बुधवार को एससी- एसटी आयोग की सदस्य स्वराज विद्वान भी अस्पताल पहुंची। उन्होंने एमएस डॉ. केके टम्टा से बच्ची की स्थिति के बारे में जानकारी ली। डॉ. टम्टा ने उनको बताया कि बच्ची इस वक्त लगभग ठीक हालत में है और उसकी काउंसिलिंग कराई जा रही है। मनोचिकित्सक ने अभी दो से तीन दिनों तक उसकी काउंसिलिंग जारी रखने की सलाह दी है। ऐसे में अभी उसे दो से तीन दिन अभी अस्पताल में रखा जाएगा।
इस पर स्वराज विद्वान ने डॉ. टम्टा से बच्ची को प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट करने कहा। डॉ. टम्टा ने बताया कि अस्पताल में प्राइवेट वार्ड नहीं है। लिहाजा बच्ची जनरल वार्ड में ही रहेगी। हालांकि, यह वार्ड सेमी प्राइवेट वार्ड है। यहां पर्दे और कूलर लगाकर इसे प्राइवेट की तरह बना दिया गया है। उन्होंने बताया कि बच्ची की जांच रिपोर्ट भी आ चुकी हैं। सभी रिपोर्ट सामान्य आई हैं।