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नौटी में होगा नंदा राजजात का समापन
ब्यूरो / अमर उजाला, कर्णप्रयाग
Updated Sun, 07 Sep 2014 12:23 PM IST
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18 अगस्त से शुरू हुए हिमालयी सचल महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात में शामिल बारह थोकी ब्राह्मणों और कुमाऊं के राजवंशियों ने शनिवार को विदा ले ली है।
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संगम पर हुआ शुद्धिकरण
अलकनंदा और पिंडर के पवित्र संगम पर हवन और स्नान के बाद मां गंगा को प्रणाम कर ब्राह्मणों, राजवंशियों सहित श्रद्धालुओं ने अपनी राह पकड़ी। घाट से नौटी पंहुचने से पहले राजकुंवरों, कुमाऊं के राजवंशियों और बारह थोकी ब्राह्मणों का यहां संगम पर शुद्धिकरण हुआ।
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राजजात यात्रा के मुख्य पुजारी अनुसूया प्रसाद कोठियाल के अनुसार यात्रा के दौरान अशुद्धियों, आसुरी शक्तियों सहित गलतियों की क्षमा याचना के लिए गंगा स्वरूपा अलकंनदा और पिंडर के प्रयाग पर यह यज्ञ किया जाता है।
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यहां राजवंशी कुंवर, कुमाऊं के राजवंशी, राज गुरु और श्रद्धालु स्नान कर जनेऊ बदलते हैं जिसके बाद मां गंगा और मां उमा को प्रणाम कर कुमाऊं के राजवंशी और बारह थोकी ब्राह्मण राजकुंवरों और राजगुरुओं से विदा लेते हैं।
शनिवार को प्रयाग पर करीब हवन आदि अनुष्ठान किए गए जिसमें राजकुंवर डा. राकेश सिंह, कुंवर तेजेंद्र सिंह, कुमाऊं के राजवंशियों के प्रतिनिधि विधायक ललित फर्स्वाण, राजगुरु भुवन नौटियाल, दीपक नौटियाल, डॉ. अतुल नौटियाल, राकेश रतूड़ी सहित 12 थोकी ब्राह्मण शामिल रहे।
भुवन नौटियाल ने बताया कि रविवार को नौटी से राजकुंवरों की विदाई के बाद राजजात यात्रा का समापन होगा। इस धार्मिक उत्सव को देखने सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु संगम पर पहुंचे।
मंदिर में प्रवेश करेगी दशमद्वार की नंदा
नंदा को कैलास विदा कर दशमद्वार की मां नंदा की डोली शनिवार को बांतोली पहुंची। अंतिम पड़ाव बांतोली में ग्रामीणों ने अपनी आराध्य देवी का भव्य स्वागत किया। बांतोली में विश्राम के बाद रविवार को नंदा भाई लाटू और स्वर्का के भूमियाल (केदारू) देवता भी विदा होंगे जबकि नंदा की डोली हिंडोली स्थित मंदिर में प्रवेश करेगी।
नंदा को कैलास विदा करने के लिए दशमद्वार की नंदा की डोली 22 अगस्त को कैलास के लिए रवाना हुई थी। 29 अगस्त को वाण में राजजात में शामिल हुई। होमकुंड में पूजा अर्चना के बाद शुक्रवार को घाट और शनिवार को घाट से करीब 19 किमी दूर बांतोली पंहुची।
पुजारी प्रेमबल्लभ पंत के अनुसार बांतोली में रात्रि विश्राम के बाद मां नंदा अपने भाई नौली के लाटू और स्वर्का के भूमियाल देवता से विदा होगी। यहां पर इस धार्मिक उत्सव को भव्य रूप से मनाया जाता है।
स्थानीय ग्रामीण लक्ष्मण सिंह बिष्ट, महिपाल सिंह, भरत सिंह, जितेंद्र सिंह आदि के अनुसार रविवार को मां नंदा के मंदिर में प्रवेश की भव्य तैयारियां की जा रही है।