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नंदा राजजात का गढ़वाल नरेश से है गहरा नाता

Wed, 06 Aug 2014 11:41 PM IST
विनय बहुगुणा/अमर उजाला, कर्णप्रयाग
विनय बहुगुणा/अमर उजाला, कर्णप्रयाग Updated Wed, 06 Aug 2014 11:41 PM IST
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nanda raj jat start by king of garhwal

उत्तराखंड के 52 गढ़ों में शामिल चांदपुर गढ़ी गढ़वाल राजाओं की पहली राजधानी रही है। श्रीनंदा राजजात में भी इस गढ़ी का विशेष महत्व है।

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यहां जब नंदा राजजात पहुंचती है तो इससे आगे गढ़वाल (टिहरी) नरेश नंदा की पूजा कर उन्हें हिमालय के लिए विदा करते हैं। इस बार 21 अगस्त को टिहरी नरेश यहां पहुंचकर नंदा की विशेष पूजा-अर्चना के बाद उन्हें हिमालय के लिए विदा करेंगे।
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कर्णप्रयाग-नैनीताल मोटर मार्ग पर स्थित चांदपुर गढ़ी, सड़क से लगभग 300 मीटर ऊपर एक पहाड़ी पर स्थित है। यहां लगभग 35-40 नाली भू-भाग पर किले एवं अन्य निर्माण किया गया है, जिसके अवशेष आज भी हैं।

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राजा शालीपाल ने शुरू की थी राजजात

nanda raj jat start by king of garhwal

मान्यताओं के अनुसार सातवीं शताब्दी में गढ़वाल के राजा शालीपाल ने राजजात की परंपरा शुरू की थी। चांदपुर गढ़ी में राजा ने देवी मंदिर का निर्माण कर भव्य मूर्ति स्थापित की, जिसकी पूजा होती थी।

14वीं शताब्दी में राजा अजय पाल ने चांदपुर गढ़ी से राजधानी देवलगढ़ में स्थापित की, लेकिन मां श्रीनंदा की नियमित पूजा की जिम्मेदारी नौटी गांव के राजगुरु नौटियाल और राजजात की कांसुवा गांव के कुंवरों को सौंपी गई।

इसी परंपरा का निर्वहन करने के लिए श्रीनंदा राजजात में टिहरी नरेश स्वयं चांदपुर गढ़ी पहुंचकर आराध्य देवी के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं।

राजजात में शामिल हुए ये टिहरी नरेश

nanda raj jat start by king of garhwal

वर्ष 1968 की राजजात में राजा मानवेंद्र शाह ने चांदपुर गढ़ी में नंदा की पूजा की थी।
वर्ष 1987 में राजा के अनुज शारदुल विक्रम शाह ने पूजा की थी।
वर्ष 2000 में किन्हीं कारणों से टिहरी राजा राजजात में नहीं पहुंच पाए थे।
वर्ष 2014 में मानुजेंद्र शाह और राज्यलक्ष्मी शाह पूजा-अर्चना करेंगे।

राजजात में टिहरी से राजा आराध्य के दर्शनों और पूजा के लिए चांदपुर गढ़ी पहुंचते हैं। विशेष पूजा-अर्चना के बाद वे स्वयं मां नंदा को हिमालय के लिए विदा करते हैं। टिहरी नरेश और उनकी पत्नी व सांसद को न्योता भेजा जा चुका है।
-डॉ. राकेश कुंवर अध्यक्ष राजजात समिति।

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