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उत्तराखंडः 10 हेक्टेयर से कम वनों को वन न मानने के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
Wed, 11 Dec 2019 08:31 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 11 Dec 2019 08:31 AM IST
सार
- सरकार को हाईकोर्ट से झटका, 21 नवंबर 2019 को जारी किया था आदेश
- अदालत ने 2 जनवरी 2020 तक मामले में जवाब दाखिल करने को कहा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : social media
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विस्तार
10 हेक्टेयर से कम परिक्षेत्र में फैले अथवा 60 प्रतिशत से कम घनत्व वाले वनों को वन नहीं मानने के सरकार के 21 नवंबर 2019 के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। अदालत ने इस संबंध में सरकार से 2 जनवरी 2020 तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
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मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। नैनीताल निवासी पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 21 नवंबर 2019 को उत्तराखंड के वन एवं पर्यावरण अनुभाग की ओर से वन को पारिभषित करने का एक आदेश जारी किया गया है।
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इसमें उत्तराखंड में 10 हेक्टेयर से कम अथवा 60 प्रतिशत से कम घनत्व वाले वन परिक्षेत्र को वनों की श्रेणी से बाहर रखा गया है। वन विभाग ने ऐसे वनों को वन नहीं माना है। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह आदेश एक कार्यालयी आदेश है, जिसे लागू नहीं किया जा सकता है क्योंकि न तो यह शासनादेश है और न ही यह कैबिनेट से पारित है।
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याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार ने इसे अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए जारी किया गया है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि फॉरेस्ट कन्जर्वेशन एक्ट 1980 के अनुसार प्रदेश में 71 प्रतिशत वन क्षेत्र घोषित है। इसमें वनों की श्रेणी को भी विभाजित किया हुआ है लेकिन इसके अलावा भी कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जिनको किसी भी श्रेणी में नहीं रखा गया है।
याचिका में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के अपने आदेश गोडा वर्मन बनाम केंद्र सरकार में कहा है कि कोई भी वन क्षेत्र, चाहे उसका मालिक कोई भी हो, उसे वनों के क्षेत्र की श्रेणी में रखा जाएगा और वनों का अर्थ क्षेत्रफल या घनत्व से नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना था कि इन क्षेत्रों को भी वन क्षेत्र की श्रेणी में शामिल किया जाए जिससे इनके दोहन या कटान पर रोक लग सके। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार के आदेश पर रोक लगा दी।