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Amar Ujala Exclusive: शहरी क्षेत्रों में अब आसानी से होगा दाखिल खारिज, भू-राजस्व अधिनियम में संशोधन

Wed, 14 Sep 2022 05:35 PM IST
रेनू सकलानी विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 14 Sep 2022 05:35 PM IST
सार

दिसंबर 2020 में हाईकोर्ट ने एक मामले में अहम आदेश पारित कर लैंड रेवेन्यू (एलआर) एक्ट में राजस्व विभाग के कार्यों को नगर निकाय की सीमा में म्यूनिसिपल कार्पोरेशन एक्ट-1975 के तहत कराने के आदेश दिए थे। इसमें कहा गया था कि संविधान के अनुच्छेद 243 क्यू में नगर पंचायत, नगरपालिका, नगर निगम बनाने की प्रक्रिया तय की गई है, जबकि 1901 के लैंड रेवेन्यू एक्ट के अनुसार राजस्व अधिकारी ग्रामीण इलाकों के लिए हैं।

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Mutation amendment in Land Revenue Act gazette notification issued Amar Ujala Exclusive Uttarakhand news
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : i stock

विस्तार

प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में दाखिल खारिज (म्यूटेशन या नामांतरण) का पेच दूर हो गया है। अब नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत सहित सभी निकाय क्षेत्रों में पूर्व की भांति जमीनों का दाखिल खारिज हो सकेगा। प्रदेश सरकार ने गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम 1901) संशोधन 2022 लागू कर दिया है।

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राज्यपाल की संस्तुति के बाद प्रमुख सचिव हीरा सिंह बोनाल की ओर से गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया है। दिसंबर 2020 में हाईकोर्ट ने एक मामले में अहम आदेश पारित कर लैंड रेवेन्यू (एलआर) एक्ट में राजस्व विभाग के कार्यों को नगर निकाय की सीमा में म्यूनिसिपल कार्पोरेशन एक्ट-1975 के तहत कराने के आदेश दिए थे। इसमें कहा गया था कि संविधान के अनुच्छेद 243 क्यू में नगर पंचायत, नगरपालिका, नगर निगम बनाने की प्रक्रिया तय की गई है, जबकि 1901 के लैंड रेवेन्यू एक्ट के अनुसार राजस्व अधिकारी ग्रामीण इलाकों के लिए हैं।
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इसके बाद शहरी क्षेत्रों में भू राजस्व संबंधी मामलों को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। खासकर दाखिल खारिज और भू-त्रुटि सुधार संबंधी मामलों का निपटारा नहीं हो पाने के कारण ये मामले लंबित होते चले गए। अब पूर्व की भांति राजस्व संबंधी मामले दाखिल खारिज और भूलेख संबंधी त्रुटि के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों को सक्षम प्राधिकारी बना दिया गया है। 
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लैंड रेवेन्यू (एलआर) एक्ट में संशोधन कर गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। एक्ट में यह व्यवस्था पहले भी थी, लेकिन भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, जिसे अब दूर कर दिया गया है। इस संबंध में उच्च न्यायालय के सम्मुख सरकार का पक्ष रखकर स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी। - डॉ.आनंद श्रीवास्तव, अपर सचिव, राजस्व

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