संग्रहालय के रूप में संजोया जाएगा पुराना केदारनाथ
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केदारनाथ धाम में अब यादों को सहेजने और संवदेनाओं को संवारने का काम भी किया जाएगा।
निर्माण में जुटी नेहरु पर्वतारोहण संस्थान(निम) अब केदारनाथ में संग्रहालय बनाने की तैयारी में भी है। निम को निर्माण कार्य के दौरान कई पुरानी और दुर्लभ वस्तुएं भी केदारनाथ में मिल रही है।
दूसरी ओर पुरोहितों को भी यह अवसर दिया जाएगा कि ध्वस्तिकरण के दौरान अगर उन्हें कोई संजो कर रखने वाली निशानी मिलती है तो उसे भी संरक्षित कर रखा जाएगा।
निम की कोशिश जून 2013 की आपदा की त्रासदी की भयावहता को कम से कम करने की है। ध्वंस के साथ निर्माण भी जुड़ा हुआ है। केदारनाथ में निम की कोशिश भी यही है।
निम इस समय केदारनाथ में घाट और सुरक्षा दीवार के निर्माण में जुटा हुआ है। इस निर्माण कार्य के दौरान केदारनाथ में मिट्टी में दबी हुई कई वस्तुएं भी मिल रही है।
भावनात्मक रूप से केदारनाथ से जोड़ने की कोशिश
निम के मुताबिक हर वस्तु को सहेज कर रखा जा रहा है। इन वस्तुओं की बाद में कार्बन डेटिंग भी कराई जाएगी और यह भी देखा जाएगा कि यह कितनी मूल्यवान है। अगर कोई मूल्यवान वस्तु मिलती है तो उसको संग्राहलय बनाकर संरक्षित किया जाएगा।
रामबाड़ा में आपदा के दौरान मारे गए लोगों की याद में शहीद स्थल बनाने की घोषणा प्रदेश सरकार पहले ही कर चुकी है। अब निम केदारनाथ में पुरोहितों को अपनी यादों को सहेजने का मौका भी दे रही है। केदारनाथ में करीब तीन दर्जन मकानों को ढहाया जाना है तो आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हो गए थे।
निम के मुताबिक ध्वंस करते समय अगर भवन स्वामी को कोई ऐसी वस्तु मिलती है जिसे वह अपने प्रियजन की निशानी के तौर पर संजो कर रखना चाहता है तो मुआवजा देकर इस निशानी को संग्रहालय में रखा जाएगा।
मसलन किसी को अगर पुराना संदूक या गहना मिलता है तो इसको सहेजा जाएगा। निम प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल के मुताबिक यह कोशिश लोगों को भावनात्मक रूप से केदारनाथ से जोड़ने की है।