फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   mumbai kauthig 2016 festival closing.

पहाड़ी रंग-तरंग के साथ मुंबई कौथिग का समापन

Fri, 29 Jan 2016 07:23 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, मुंबई-देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, मुंबई-देहरादून Updated Fri, 29 Jan 2016 07:23 PM IST
विज्ञापन
mumbai kauthig 2016 festival closing.

पहाड़ी रंग, तरंग और स्वाद के बेहतरीन तालमेल के साथ मुंबई कौथिग-2016 का सफल समापन हो गया।

विज्ञापन


इस मौके पर फोटोग्राफ मुकेश खुगशाल ने अपनी फोटो प्रदर्शनी के जरिए पहाड़ के चटकीले रंगों से प्रवासी उत्तराखंडियों को रूबरू कराया। इसके अलावा कुमाऊंनी लोकगायक फौजी ललित मोहन जोशी ने अपने गीतों से खूब समां बांधा। उन्होंने जैसे ही अपना लोकप्रिय गीत ‘टक टका टक कमला... ’ गाना शुरू किया तो पहाड़ी गीतों के दीवाने मंच के पास आकर झूमने लगे।
 
बुधवार को कार्यक्रम के समापन पर फिल्म अभिनेत्री उर्वशी रौतेला भी पहुंची। कौथिग के पदाधिकारियों ने उन्हें सम्मानित किया। पहाड़ी शैली में स्लेटी पत्थरों वाले घर, सीढ़ीदार खेत, पहाड़ी रास्ते, नदियां सबको समेटे चित्रों को उत्तराखंड के प्रवासियों ने काफी सराहा। खुगशाल छात्र जीवन से ही फोटोग्राफी कर रहे हैं।
विज्ञापन


इससे पहले इनकी नंदा देवी राजजात पर पोलेंड के फोटोग्राफरों के साथ दिल्ली के हैविटेड सेंटर में प्रदर्शनी लग चुकी है। पेरिस के वर्ल्ड पीस समिट में इनकी खींची गई फोटो प्रदशनी के लिए चयनित की गई। जिस पर पौलेंड के राजदूत के हाथों इन्हें अभिव्यक्ति सम्मान दिया गया। खुगशाल की फोटोग्राफी को काफी सराहा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कार्यक्रम की आखिरी शाम कुमाऊंनी लोकगायक फौजी ललित मोहन जोशी ने कश्मीर बॉर्डरा प्यारी, ओ चंदू ड्राइवरा माठु माठु गाड़ि चला, नैनीतालै की मधुली हिट मेरो दगाड़ा जैसे तमाम लोकगीत प्रस्तुत कर देर रात तक प्रवासियों का मनोरंजन किया।

इसके साथ ही उत्तराखंड प्रवासियों की कौथिग फाउंडेशन का नवां कौथिग बुधवार रात संपन्न हो गया। मुंबई में आयोजित इस कौथिग में देश-विदेश में रहने वाले सैकड़ों उत्तराखंड प्रवासियों का पुनर्मिलन समारोह भी आयोजित किया गया।


पलायन की समस्या पर चिंता जाहिर करते हुए वरिष्ठ पत्रकार वेदविलास उनियाल ने कहा कि पलायन केवल उत्तराखंड नहीं बल्कि पूरे देश की समस्या है। उत्तराखंड के गांवों का जीवन कई मायनों में महत्वपूर्ण है इसलिए अपनी जड़ों की ओर लौटना जरूरी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed