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मां बच्चे की सेहत से हो रहा खिलवाड़
अरुणेश पठानिया / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 22 Aug 2014 02:56 PM IST
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जच्चा बच्चा सेहत को लेकर उत्तराखंड सहित आठ सर्वाधिक कमजोर राज्यों में कोई खास सुधार नहीं हो रहा है।
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ताजा रिपोर्ट के आंकड़े चिंताजनक
मातृ और शिशु स्वास्थ्य को लेकर जनगणना विभाग की ताजा रिपोर्ट में एंटे और पोस्ट नेटल केयर के आंकड़े चिंताजनक है। उत्तराखंड में 17 फीसदी गर्भवती महिलाओं का अनिवार्य एंटे नेटल चैकअप (एएनसी) चैकअप हो पा रहा है।
20 फीसदी शिशुओं को संपूर्ण टीकाकरण से वंचित हैं। इसी के चलते मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर के आंकड़े अन्य राज्यों के मुकाबले बेहद ज्यादा है। उत्तराखंड की सबसे खराब स्थिति सरकारी अस्पताल में प्रसव की है।
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देश की 50 फीसदी आबादी वाले आठ राज्य उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, झारखंड, मध्य प्रदेश, असम, छतीसगढ़ और ओडिशा स्वास्थ्य के मानकों में सबसे कमजोर राज्य हैं।
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इन राज्यों में शिशुओं की नवजात की मौत 71 फीसदी और पांच वर्ष से छोटे बच्चों की मौत फीसदी 72 फीसदी है, जबकि मातृ मृत्यु 62 फीसदी है।
जनगणना विभाग के वार्षिक स्वास्थ्य सर्वे की शिशु और मातृ सेहत की ताजा रिपोर्ट में चार पहलुओं पर सर्वाधिक ध्यान दिया गया है।
गर्भवती होने पर महिला के नौ माह में तीन बार अनिवार्य मेडिकल चैकअप (एएनसी), प्रसव के बाद 48 घंटे तक मां और शिशु की डाक्टर निगरानी, शिशु के पैदा होने के बाद संपूर्ण टीकाकरण इसमें शामिल हैं।
आठों राज्यों में उत्तराखंड की स्थिति अन्य राज्यों के कमोबेश बेहतर है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में प्रसव की कमजोर सुविधा चिंताजनक है।
उत्तराखंड का हाल
- सरकार अस्पतालों के संस्थागत प्रसव में हिस्सेदारी 58.3 फीसदी, जबकि सर्वाधिक मध्यप्रदेश में 85 फीसदी है।
- 83 फीसदी गर्भवती महिलाएं अनिवार्य एंटे नेटल चैकअप पूरे नहीं होते, सर्वाधिक खराब स्थिति यूपी की 93 फीसदी।
- 36 फीसदी गर्भवतियों को प्रसव के बाद मिलता है अनिवार्य पोस्ट नेटल चैकअप, सर्वाधिक अनदेखी बिहार में 40 फीसदी।
- जन्म के बाद 20 फीसदी शिशुओं का संपूर्ण टीकाकरण नहीं मिलता, यूपी में सर्वाधिक 47 फीसदी टीकाकरण से वंचित।
- 75 फीसदी शिशुओं को नहीं मिलती आयरन फोलिक एसिड की घुट्टी, राजस्थान में 88 फीसदी शिशुओं को नहीं मिल रही डोज।