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कुत्ते को टाइगर समझ बंदरों ने हिला डाला शहर
जितेंद्र पपनै/अमर उजाला, रामनगर
Updated Sat, 20 Sep 2014 06:56 PM IST
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वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध कार्बेट सिटी रामनगर उस समय सकते में आ गया, जब बंदर एक कुत्ते को बाघ समझ बैठें। दरअसल ऐसा वाकया जंगलों में ही देखने को मिलता है, जो शुक्रवार दोपहर को शहर में देखने को मिला।
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14 दिन पहले एक रिसोर्ट मालिक जापान से तिब्बतियन मैरीस्टिफ नस्ल का ढाई माह का कुत्ता लेकर बृहस्पतिवार को लखनऊ पहुंचे। शुक्रवार को रामनगर पहुंचने पर कुत्ते का टेंप्रेचर जांचने के लिए पशु अस्पताल लाया गया।
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बाघ समझ मचाया हंगामा
कुत्ते का चेकअप करने के बाद पाटकोट क्षेत्र में नवनिर्मित रिसोर्ट में ले जाते वक्त कुछ देर के लिए उसे रिसोर्ट की खुली गाड़ी में नंदा लाइन के पास खड़ा कर दिया जिससे कोतवाली के आवासीय कालोनी में एक बंदर कुत्ते को देख बाघ समझ बैठा। जिसने उसे देखते ही बंदर ने चीख पुकार शुरू कर दी।
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बंदर की चीख सुनकर कालोनी में घुसे 15-20 बंदर एकत्रित हो गए और डर के मारे एक दूसरे से लिपटकर ऊधम मचाते रहे। बंदरों को ऊधम मचाते देख रिसोर्ट कर्मी कुत्ते को अपनी गाड़ी में रखकर वहां से ले गए। तब कहीं जाकर बंदर शांत हुए।
क्या है बंदर की कॉल
दरअसल बंदर या अन्य वन्य जीव जंगल में बाघ को देखकर अपने साथियों को खतरे की कॉल करते हैं। जिससे वह या और वन्यजीव बाघ का शिकार बनने से बचने के लिए वह स्थान छोड़ देते हैं। इस मामले में बंदर की कॉल सटीक मानी जाती है।
ठीक ऐसा की वाकया आज शहर में उस समय हुआ, जब तिब्बतियन मैरीस्टिफ नस्ल के कुत्ते को बंदर बाघ समझ बैठे। जिससे शहर 15-20 मिनट तक मानों कार्बेट का जंगल बन गया हो।