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पहले इलेक्ट्रिक शॉक देकर जानवर होंगे ब्रेन डेड, फिर काटे जाएंगे

Fri, 03 Jul 2015 07:52 PM IST
मनमीत रावत/अमर उजाला, देहरादून
मनमीत रावत/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 03 Jul 2015 07:52 PM IST
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modern slaughter house in uttarakhand.

उत्तराखंड में अब भैंसों और बकरे समेत अन्य पशुओं का कटान धारदार हथियारों से नहीं किया जाएगा। राज्य में पीपीपी मोड पर 15 नए पशु वधशाला (स्लाटर हाउस) बनाए जाएंगे। इन पशु वधशाला में अति आधुनिक मशीनों से जानवरों का कटान किया जाएगा।

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शहरी विकास विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया है। एक टीम कोलकाता के आधुनिक पशु वधशाला का निरीक्षण करके लौटी है। रिपोर्ट शहरी विकास सचिव को सौंपी गई है। शहरी विकास सचिव डीएस गर्ब्याल का कहना है कि दो माह में पशु वधशाला का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
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प्रदेश में देहरादून, हल्द्वानी, रुड़की और काशीपुर में स्लाटर हाउस में भैंस आदि पशुओं का कटान किया जाता है। जबकि प्रदेश के 13 जिलों में बकरों के कटान की व्यवस्था है। इन इलाकों में हर दिन सैकड़ों पशुओं का वध किया जाता है। अभी तक पुराने तौर तरीकों से पशुओं का वध किया जाता है, जो दर्दभरा और असंवेदनशील होता है।

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अभी काटा जाने वाला तरीका बहुत ही दर्दनाक

modern slaughter house in uttarakhand.

यहां पर जानवरों को धारदार हथियार से बेहद बेरहमी से काटा जाता है, जिससे वह तड़प-तड़पकर मरते हैं। लेकिन अब आधुनिक पशुवध शाला में ही पशुओं का वध किया जाएगा।

शहरी विकास सचिव डीएस गर्ब्याल ने बताया कि सेंट्रल पब्लिक हेल्थ एंड इनवायरमेंट इंजीनियरिंग आर्गेनाइजेशन की गाइड लाइन के अनुसार पशु वधशाला का निर्माण किया जाएगा। इसके तहत छोटे, मध्यम और बड़ी क्षमता वाले तीन अलग-अलग तरह के पशु वधशाला का निर्माण किया जाएगा।

सभी का निर्माण पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के तहत होना है, जिसमें सत्तर फीसदी खर्च प्राइवेट कंपनी को करना होगा और 25 फीसदी सरकार उठाएगी। पांच फीसदी खर्च नगर निकायों को देना होगा। जल्द ही इनका निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।

इलेक्ट्रिक शॉट देते ही ‌द‌िमाग हो जाएगा सुन्न

modern slaughter house in uttarakhand.

आधुनिक स्लाटर हाउस में जानवरों को मारने का अलग तरीका होता है। यहां पर जानवरों को पहले बिजली का झटका दिया जाता है। माइक्रो सेकेंड का यह झटका जानवर का दिमाग सुन कर देता है, उसके बाद उसे चाहे हलाल किया जाए या झटके से काटा जाए। जानवर को इसका एहसास नहीं होता है।

इस प्रक्रिया का कोलकाता में एक धर्म विशेष के लोगों ने विरोध किया था। लिहाजा कोलकाता में इससे भी आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जाता है। कोलकाता के स्लाटर हाउसों में जानवरों का ब्रेन डेड नहीं किया जाता।

हालांकि बाद में वही प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो आधुनिक मशीनों में की जाती है। शिमला और कई अन्य स्थानों पर जानवरों का ब्रेन डेड करने की व्यवस्था है।

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