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खैरवार बने मिशन निदेशक, सामने चुनौतियों की ‘चोटी’
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 19 Nov 2014 01:47 AM IST
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लंबे समय से विवादों में रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक पद की जिम्मेदारी आईएएस नीरज खैरवार ने संभाल ली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मिशन का वार्षिक प्लान निदेशक की गैरमौजूदगी में पटरी से उतर गया है।
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इस दौरान केंद्र की कामन रिव्यू मिशन (सीआरएम) टीम ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का निरीक्षण कर कई खामियां पाई हैं। ऐसे में नए मिशन निदेशक के सामने मौजूदा वार्षिक योजना को प्रभावी बना केंद्र के निर्धारित स्वास्थ्य संकेतकों के लक्ष्य हासिल करने की चुनौती रहेगी।
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लंबे समय के बाद मिला निदेशक
राज्य में एनएचएम के अधीन जननी शिशु सुरक्षा, बाल स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य, शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम, निःशुल्क जेनरिक दवा, 108 आपात सेवा, पब्लिक हेल्थ कैडर सहित चार अतिसंवेदनशील जनपदों में स्वास्थ्य संकेतकों को सुधारने और अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण से लेकर चिकित्सकों की तर्कसंगत तैनाती सुनिश्चित की जानी है।
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20 सितंबर को केंद्र ने स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रोजेक्ट इम्पिमेंटेशन प्लान (पीआईपी) 394 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी। पीआईपी की स्वीकृति के बाद से मिशन निदेशक का प्रभार हरबंस चुघ को दिया, लेकिन वह लंबी छुट्टी पर चले गए।
आखिर शासन ने तीन नवंबर को चुघ के बदले विदेश में ट्रेनिंग पर गए नीरज खैरवार को प्रभार सौंप दिया, जो अब वापस लौटें हैं। इस बीच दो माह का समय बीत गया, लेकिन अभी तक वित्तीय वर्ष 2014-15 की पीआईपी का अनुपालन शुरू नहीं हुआ।
नए निदेशक के सामने चुनौतियां
अब नए मिशन निदेशक के सामने कई चुनौतियां हैं, जिसमें वित्तीय स्वीकृतियां नहीं मिलने से लटके कार्यक्रमों का अनुपालन करवाने के साथ अगले वर्ष 2015-16 की पीआईपी तैयार करना भी शामिल है। इतना ही नहीं अगर मौजूदा प्लान के अनुपालन में और देरी होती है तो केंद्र स्वीकृत 394 करोड़ के प्लान की दूसरी किस्त में कटौती कर सकती है।