यहां अफसर कर रहे कर्मियों की इज्जत 'तार-तार'
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उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की सेहत गड़बड़ा गई है।
मिशन के संचालन के लिए अनुबंधित विभिन्न क्षेत्रों के प्रोफेशनल ने आला अधिकारियों पर अमर्यादित भाषा, दुर्व्यवहार से लेकर मानसिक उत्पीड़न के संगीन आरोप जड़े हैं। एक दशक से अनुबंधित दो दर्जन से अधिक कर्मियों ने मुख्य सचिव को पत्र लिख अपने सामूहिक त्यागपत्र की विवशता जताई है।
6 माह में दस प्रोफेशनल मानसिक प्रताड़ना के चलते त्यागपत्र सौंप चुके हैं। ऐसे में मिशन के पटरी से उतरने की आशंका गहरा सकती है। एनएचएम के तहत वर्ष 2004 से सेवाएं दे रहे विभिन्न क्षेत्रों वित्त, आईटी, प्रबंधक, इंजीनियर सहित डाटा एंट्री आपरेटर जैसे अनुबंधित कर्मियों ने मिशन निदेशक से लेकर अन्य आला अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं।
कर्मचारियों को सबसे बड़ा भय इस बात की है कि वह अनुबंधित सेवाओं पर हैं अगर वह आला अधिकारियों के खिलाफ मुंह खोलते हैं तो नौकरी हाथ से जाएगी।
यह लगे हैं आरोप
ऐसे में मिशन के 28 अनुबंधित कर्मचारियों ने मुख्य सचिव एन रविशंकर को पत्र लिखकर अपनी आप बीती रखी है। कर्मचारियों ने सामूहिक निर्णय लिया है कि अगर उनकी समस्याओं का हल नहीं निकला तो उनके पास कार्य बहिष्कार या फिर त्यागपत्र देने का विकल्प ही बचेगा। पत्र ने मिशन निदेशक की कार्यप्रणाली पर सवाल खडे़ किये गए हैं।
आरोप
- उच्चाधिकारियों का कर्मियों से अमर्यादित शब्दों का प्रयोग
- दुर्व्यवहार पर आपत्ति जताने से अनुबंध समाप्त करने की धमकी मिलना
- समय पर मासिक मानदेय नहीं दिया जाना
- स्वीकृत अवकाशों को अस्वीकृत कर मानसिक प्रताड़ना देना
- वार्षिक कार्य अनुबंध के बदले मात्र तीन माह के अनुबंध हस्ताक्षरित करवाना
- राजकीय अवकाश परक कार्य लेना और उसके बदले प्रतिकर अवकाश नहीं देना
- अतिरिक्त दायित्व थोपने से मुख्य कार्य बाधित होने पर तुरंत बताओ नोटिस थमाना
- नए तैनात संविदा कर्मियों को पुराने से अधिक मानदेय दिया जाना
- मिशन में मानव संसाधन नियमावली लागू नहीं होगा