महाराज की वजह से अमृता की हुई फजीहत!
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लगातार तीन बार की कांग्रेस विधायक अमृता रावत के राजनीतिक जीवन में भी गढ़वाल के पूर्व सांसद सतपाल महाराज का नाम किसी न किसी तरह से जुड़ा ही रहा।
महाराज की पत्नी होने का अमृता रावत को फायदा भी मिलता रहा और अब उन्होंने नुकसान भी उठाया। महाराज के भाजपा में शामिल होने के बाद से ही अमृता रावत को सफाई देनी पड़ रही है।
उस समय उनका कहना था कि महाराज का यह अपना फैसला है पर घात प्रतिघात की राजनीति में आखिरकार उनसे उनका मंत्रि पद छिन ही गया।
राज्य गठन के बाद से लगातार जीत रही हैं चुनाव
अमृता रावत उन विधायकों में शामिल हैं जो राज्य गठन के बाद से लगातार चुनाव जीत रहे हैं।
पहले दो चुनाव में अमृता बीरोंखाल से विधायक बनी और परिसीमन के बाद रामनगर उनका नया ठिकाना बना।
पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के मुख्यमंत्री रहते हुए अमृता रावत ने ऊर्जा राज्य मंत्री का दायित्व निभाया। कांग्रेस की बहुगुणा सरकार के कार्यकाल में भी उन्हें पर्यटन और उद्यान जैसे महत्वपूर्ण महकमे मिले।
राजनीतिक हल्के में उनकी इन तमाम सफलताओं में महाराज का हाथ भी देखा जाता रहा। खास मौकों पर महाराज की पैरवी भी उनके काम आई।
बीजेपी का दामने थामने के बाद बढ़ी परेशानियां
पर्यटन मंत्री रहते हुए अमृता रावत खुद टिहरी बांध के विकास के लिए जितनी सक्रिय रहीं, उतने ही सक्रिय सतपाल महाराज भी दिखाई देते रहे।
इसी तरह विधानसभा चुनाव में भी उनके क्षेत्र में महाराज की सक्रियता लगातार बनी रही। यही कारण भी रहा कि अमृता रावत के राजनीतिक जीवन के अभिन्न हिस्से के रूप में खुद सतपाल महाराज को भी देखा जाता रहा।
ऐसे में महाराज के भाजपा का दामन थामते ही अमृता के लिए परेशानियों का पहाड़ भी खड़ा होना शुरू हो गया था।
भाजपा में जाने की जितनी सफाई महाराज को देनी पड़ी, उतनी ही सफाई अमृता रावत के खाते में भी आई।
अमृता रावत की डगर अब और भी कठिन
अमृता रावत को भी गाहे बगाहे यह साफ करना पड़ता रहा कि महाराज के भाजपा का दामन थामने के फैसले की उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। महाराज अपना राजनीतिक फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
पर अमृता की बार-बार की सफाई भी उनके काम नहीं आई। लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद अमृता रावत के लिए डगर अब और भी कठिन हो गई है।
उनके अपने क्षेत्र में कांग्रेस की हालत खराब रही। हालांकि पूरे प्रदेश में सिर्फ सात ही सीटें हैं जिनपर कांग्रेस बढ़त ले पाई पर अमृता के महाराज कनेक्शन के कारण उनके विरोधियों के लिए हल्ला मचाना आसान हो गया।