महा घोटालाः किसने खाई डेढ़ करोड़ की दवाएं?

अनिल चंदोला/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 13 Oct 2015 04:30 PM IST
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medicine scam in doon hospital.

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दून अस्पताल में हुई करीब डेढ़ करोड़ की दवाओं की लोकल परचेज (एलपी) सवालों के घेरे में है। खरीद की जांच के लिए महानिदेशालय स्तर पर चार सदस्यीय समिति गठित की गई है।
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दून ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की निदेशक आभा ममगाई ने दून अस्पताल के पीएमएस को पत्र भेजकर जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। 15 अक्तूबर से समिति अस्पताल में जांच शुरू करेगी। दून अस्पताल पर देनदारी की खबरें काफी समय से चर्चा में हैं।
विशेषकर दवाओं की लोकल परचेज (एलपी) पर खर्च हुई करीब डेढ़ करोड़ की धनराशि पर सवाल उठते रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद आठ अक्तूबर को स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आरपी भट्ट ने चार सदस्यीय समिति गठित कर मामले की जांच के निर्देश दिए।
अब दून ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की निदेशक आभा ममगाई ने दून अस्पताल के पीएमएस को पत्र भेजकर जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। कहा कि महानिदेशालय स्तर से गठित समिति अभिलेखों व अन्य संगत विषयों की जांच करेगी। इसके लिए समिति को आवश्यक दस्तावेज व जानकारियां उपलब्ध कराई जाए। एलपी के साथ ही अस्पताल के अन्य खर्चों पर भी सवाल उठाए गए हैं।

दून अस्पताल को मिले सात करोड़
दून अस्पताल को स्वास्थ्य महानिदेशालय ने सोमवार को सात करोड़ रुपये की धनराशि जारी की। इससे अस्पताल में दवाओं की खरीद समेत अन्य व्यवस्थाएं सुचारू हो सकेंगी। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस असवाल ने कहा कि बजट आवंटित होने के बाद सभी देनदारों को यथासंभव वितरित किया जाएगा।

आसान नहीं होगा प्रदेश में घटिया दवा बेचना
प्रदेश में नकली और घटिया दवाओं की बिक्री आसान नहीं रहेगी। दवाओं की निर्माण, बिक्री, खरीद, आपूर्ति और गुणवत्ता पर स्वास्थ्य विभाग की नजर रहेगी। इसके लिए नए स्तर से ड्रग कंट्रोलर समेत अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है।

राज्य के अलग-अलग जगहों से घटिया और मिस ब्रांड की दवाओं की बिक्री की शिकायतें मिलती रहती हैं। प्राइवेट अस्पताल और केमिस्ट ही नहीं, सरकारी अस्पतालों की दवाओं पर भी सवाल उठते रहे हैं। कुछ समय में सरकारी अस्पतालों में सप्लाई होने वाली दवा के सैंपल भी फेल मिले हैं।

औषधि नियंत्रण विभाग इसके पीछे ड्रग इंस्पेक्टर व अन्य अधिकारियों की कमी का बहाना बनाता रहा है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इसके तहत प्रदेश में एक ड्रग कंट्रोलर और पांच क्षेत्रीय कार्यालय खोलने की तैयारी है। दवाओं के निर्माण से लेकर बिक्री तक पर विभाग की नजर रहेगी। केंद्र को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया है।

15 दिन में मिलेगा लाइंसेस

विभाग अब दवा निर्माण, बिक्री और आपूर्ति के लाइसेंस जारी करने को सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने जा रहा है। इसके तहत आवेदन के 15 दिनों में लाइसेंस जारी किया जाएगा। इससे दवाओं की गुणवत्ता भी नियमित तौर पर जांची जा सकेगी।

पीएमयू रखेगी नजर
दवाओं के क्वालिटी कंट्रोल के लिए राजस्थान की तर्ज पर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट बनेगी। यह यूनिट दवाओं के निर्माण, खरीद, बिक्री, आपूर्ति और गुणवत्ता पर नजर रखेगी। नेशनल और स्टेट ड्रग लिस्ट के अनुसार दवाओं की आपूर्ति की जाएगी। इसका प्रस्ताव और ढांचा तैयार कर लिया गया है। इसके बाद सभी तरह की दवाएं निशुल्क वितरित की जाएंगी। इसके लिए विभाग का दवाओं का पूरा बजट इसी योजना में शामिल किया जाएगा।

केंद्र सरकार को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया है। इससे दवाओं की गुणवत्ता, निर्माण, खरीद और बिक्री पर नजर रखी जा सकेगी। ड्रग क्वालिटी कंट्रोल में आसानी रहेगी।
- डॉ. आरपी भट्ट, स्वास्थ्य महानिदेशक
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