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कौन आता था मेडिकल कॉलेज की ड्रेस में मिलने?
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 13 May 2015 04:50 PM IST
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मेडिकल पीजी कोर्स के नाम पर देशभर में करोड़ों की ठगी करने वालों के तार एक निजी मेडिकल कॉलेज में किससे जुड़े हैं? यह सवाल एसआईटी को परेशान कर रहा है। जांच में सामने आया है कि ठग बाकायदा मेडिकल कॉलेज की ड्रेस में अधिकारी बनकर रौब-गालिब करते थे।
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आरोपियों पर शिकंजा कसने के बाद पुलिस उस ‘विभीषण’ पर कानूनी शिकंजा कसने का प्रयास करेगी, जो उन्हें मदद पहुंचा रहा था। उधर, आरोपियों की तलाश में पुलिस ने हरियाणा, दिल्ली में कई जगह दबिश दी, लेकिन कुछ खास हाथ नहीं लगा।
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टीम बनाकर करते थे काम
ठगी के इस गोरखधंधे में देशभर में एक साथ कई लोग बाकायदा टीम बनाकर काम कर रहे थे। पुलिस पकड़ में आया एक टीम का लीडर राजीव राणा था, जबकि अन्य टीमों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
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ठगी का शिकार हुए लोगों ने अपने बयानों में कहा है कि होटल में मेडिकल कॉलेज के कथित डायरेक्टर से मिलवाने के बाद उन्हें इस मेडिकल कालेज ले जाया जाता था, जहां पर गिरोह से जुड़े लोग मेडिकल कॉलेज की ड्रेस में वहां बैठकर अपने शिकार पर विश्वास जमाने का गेम करते थे।
कॉलेज ने किया खारिज
हालांकि मेडिकल कॉलेज के किसी अधिकृत अधिकारी से मिलने की बात अब तक सामने नहीं आई है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन पहले ही सांठगांठ की बात को खारिज कर चुका है।
एसआईटी सूत्रों का कहना है कि विवेचना में उनके जुड़ाव की गहनता से जांच पड़ताल की जाएगी। गिरोह के सरगना रोहित चौहान और अंकुश खत्री के हाथ आने के बाद भी काफी कुछ साफ होने की उम्मीद है। एसआईटी प्रभारी सदानंद दाते का कहना है कि तमाम पहलुओं पर जांच पड़ताल की जाएगी।
राजीव की रिमांड पर फैसला आज
मेडिकल पीजी कोर्स में ठगी के मामले में जेल में बंद राजीव राणा को तीन दिन और रिमांड पर दिए जाने के लिए पुलिस ने प्रार्थना पत्र दिया है, इस पर बुधवार को सुनवाई होगी।
सोमवार को चार दिन की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद राणा समेत चार आरोपियों को वापस जेल भेज दिया गया था। उधर, पुलिस ने मंगलवार को कोर्ट से वांछित किए गए दिल्ली निवासी रोहित चौहान और अंकुश खत्री के गैर जमानती वारंट जारी करा दिए।