{"_id":"60d242e58ebc3e2dae2ca4ae","slug":"mbbs-fee-higher-stipend-less-dehradun-news-drn382370559","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमबीबीएस की फीस ज्यादा, स्टाइपेंड कम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमबीबीएस की फीस ज्यादा, स्टाइपेंड कम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहरादून। उत्तराखंड में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रशिक्षु डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। प्रशिक्षुओं ने आधा दिन ड्यूूटी की और उसके बाद अपनी मांगों को लेकर धरना दिया। उन्होंने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को पत्र भी भेजा है। आरोप लगाया कि प्रदेश में एमबीबीएस की फीस ज्यादा और स्टाइपेंड सबसे कम है।
छात्रों का कहना है कि एमबीबीएस डॉक्टरों को चार साल का कोर्स पूरा करने के बाद पांचवें वर्ष अस्पतालों में प्रशिक्षु के तौर पर काम करना होता है। इसके बाद उनका मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन होता है, तभी वो प्रैक्टिस भी कर सकते हैं। इस दौरान उन्हें सरकार की ओर से स्टाइपेंड भी दिया जाता है। प्रदेश में इस वक्त प्रशिक्षुओं को स्टाइपेंड के रूप में साढ़े सात हजार रुपये मासिक दिए जा रहे हैं। उत्तर भारत के राज्यों में उत्तराखंड सबसे कम भुगतान करने वाला राज्य है। दिल्ली में 23, हिमाचल में 17 और उत्तर प्रदेश में 12 हजार रुपये प्रति माह दिया जा रहा है। दून मेडिकल कॉलेज के 134 समेत प्रदेश में कुल 330 इंटर्न डॉक्टर हैं, जो बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। वहीं पिछले दो माह से भुगतान भी नहीं किया गया है।
उत्तराखंड में फीस भी ज्यादा
प्रशिक्षु डॉक्टरों का आरोप है कि राज्य में एमबीबीएस की फीस भी ज्यादा है। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में बॉन्ड के साथ 60 हजार रुपये प्रति वर्ष फीस ली जा रही है। जबकि दून व हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में फीस साढ़े चार लाख रुपये सालाना है। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में सालाना शुल्क 30 हजार रुपये है।
विज्ञापन
23 हजार करने का भेजा है प्रस्ताव
दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि प्रशिक्षुओं की मांग पर स्टाइपेंड 23 हजार रुपये करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इस पर शासन स्तर से ही फैसला लिया जाएगा। शासन के स्तर पर जो भी तय होगा, उसी के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
विज्ञापन
छात्रों का कहना है कि एमबीबीएस डॉक्टरों को चार साल का कोर्स पूरा करने के बाद पांचवें वर्ष अस्पतालों में प्रशिक्षु के तौर पर काम करना होता है। इसके बाद उनका मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन होता है, तभी वो प्रैक्टिस भी कर सकते हैं। इस दौरान उन्हें सरकार की ओर से स्टाइपेंड भी दिया जाता है। प्रदेश में इस वक्त प्रशिक्षुओं को स्टाइपेंड के रूप में साढ़े सात हजार रुपये मासिक दिए जा रहे हैं। उत्तर भारत के राज्यों में उत्तराखंड सबसे कम भुगतान करने वाला राज्य है। दिल्ली में 23, हिमाचल में 17 और उत्तर प्रदेश में 12 हजार रुपये प्रति माह दिया जा रहा है। दून मेडिकल कॉलेज के 134 समेत प्रदेश में कुल 330 इंटर्न डॉक्टर हैं, जो बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। वहीं पिछले दो माह से भुगतान भी नहीं किया गया है।
विज्ञापन
उत्तराखंड में फीस भी ज्यादा
प्रशिक्षु डॉक्टरों का आरोप है कि राज्य में एमबीबीएस की फीस भी ज्यादा है। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में बॉन्ड के साथ 60 हजार रुपये प्रति वर्ष फीस ली जा रही है। जबकि दून व हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में फीस साढ़े चार लाख रुपये सालाना है। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में सालाना शुल्क 30 हजार रुपये है।
विज्ञापन
23 हजार करने का भेजा है प्रस्ताव
दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि प्रशिक्षुओं की मांग पर स्टाइपेंड 23 हजार रुपये करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इस पर शासन स्तर से ही फैसला लिया जाएगा। शासन के स्तर पर जो भी तय होगा, उसी के अनुसार भुगतान किया जाएगा।